आरयू ब्यूरो, लखनऊ/अयोध्या। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भगवान रामलला के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में विभिन्न स्थानों पर पूजा-अर्चना और आरती की तथा ‘श्री राम यंत्र’ की स्थापना भी किया। इस दौरान अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि अयोध्या नगरी की पवित्र धूलि का स्पर्श करना उनके लिए परम सौभाग्य की बात है।
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उन्होंने कहा कि चैत्र शुक्ल संवत्सर 2083 के प्रारंभ और नवरात्रि के पहले दिन यहां उपस्थित होना उनके लिए विशेष अवसर है। राष्ट्रपति ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर का भूमि पूजन, रामलला के दिव्य विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा, राम दरबार का भक्तों के लिए खुलना और मंदिर के शिखर पर धर्म-ध्वजारोहण ये सभी हमारे इतिहास और संस्कृति की स्वर्णिम तिथियां हैं।
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द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि देश एक समावेशी समाज और विकसित राष्ट्र के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रभु श्री राम के आशीर्वाद से 2047 तक इन लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकेगा। राष्ट्रपति ने गोस्वामी तुलसीदास के रामराज्य का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें कोई दुखी, निर्धन या वंचित नहीं होता। उन्होंने कहा कि रामराज्य आर्थिक समृद्धि और सामाजिक समरसता का सर्वोच्च आदर्श प्रस्तुत करता है।
प्रभु श्री राम के प्रति भक्ति के बंधन से जुड़कर…
साथ ही कहा कि राम राज्य के आदर्शों का पालन करते हुए हम नैतिकता और धर्माचरण पर आधारित राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। राष्ट्रपति ने सामाजिक समावेश और आर्थिक न्याय को वर्तमान राष्ट्रीय लक्ष्यों का अहम हिस्सा बताया। राष्ट्रपति ने नागरिकों से एकता की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम के प्रति भक्ति के बंधन से जुड़कर और आपसी आत्मीयता बनाए रखते हुए सभी को राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए।



















