आरयू ब्यूरो, लखनऊ। अपनी मांगों को लेकर रोडवेज के दुबग्गा डिपो में कार्यरत चार संविदाकर्मियों ने सोमवार को मुख्यमंत्री आवास के पास खुद पर ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग लगाने का प्रयास किया। ये देखकर राहगीरों में हड़कंप मच गया। जिसे देख वहां मौजूद पुलिस टीम ने चारों को हिरासत में लेकर थाने आ गई। जहां पूछताछ में संविदाकर्मियों ने बताया कि हमारी बात नहीं सुनी जा रही है। एक निजी कंपनी में सभी संविदा चालकों-परिचालकों का विलय किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि दुबग्गा डिपो पर संविदाकर्मी कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि चालक-परिचालकों का निजी कंपनी एसएस इंटरप्राइजेज में विलय किया जा रहा है, जिसका वे विरोध कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को चारों कर्मचारी कालिदास मार्ग के पास लालबत्ती चौराहा पहुंच गए और आत्मदाह का प्रयास किया। मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों ने कर्मचारियों को रोकते हुए तत्काल हिरासत में ले लिया। पुलिस चारों कर्मचारियों को थाने ले गई, जहां उनसे पूछताछ की।
दुबग्गा डिपो के संविदा परिचालकों का कहना है कि विभिन्न मांगों को लेकर कई दिनों से दुबग्गा डिपो पर कार्यबहिष्कार करके विरोध कर रहे थे मगर कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद हजरतगंज में चक्का जाम करने पहुंचे। फिर आज सोमवार को आत्मदाह करने पहुंचे थे। साथ ही पुलिस को बताया कि दुबग्गा डिपो के संविदा कर्मचारियों का प्राइवेट कंपनी एसएस एंटरप्राइजेज में विलय किया जा रहा है, जो स्वीकार नहीं है। किसी भी चालक या परिचालक को प्राइवेट कंपनी के साथ काम करना स्वीकार नहीं है। सिटी बसों में सेवा देने वाले लगभग 500 परिचालक विगत कई दिनों से हड़ताल पर हैं। इसकी वजह से शहर के 22 प्रमुख रूट पर चलने वाली सिटी बसें प्रभावित हो रही है।
वहीं गौतमपल्ली थाना प्रभारी विपिन सिंह ने बताया कि आत्मदाह का प्रयास करने वालों में औरैया के मुकेश सैनी, उन्नाव के ज्ञानेंद्र रावत, कानपुर के नितिन श्रीवास्तव और गोंडा के अभिषेक सिंह शामिल हैं। चारों सिटी बस सेवा के चालक बताए जा रहे हैं। लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
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बता दें कि निजी फर्म में भेजे जाने का विरोध कर रहे हैं
कर्मचारियों ने 29 मई के प्रदर्शन के दौरान लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने मार्च 2026 से वेतन लंबित होने का भी आरोप लगाया, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई कर्मचारियों ने परिवार का खर्च उठाने में आ रही मुश्किलों का जिक्र किया। उन्होंने कुछ अधिकारियों पर मानसिक उत्पीड़न, धमकी देने और भय का माहौल बनाने का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने तीन प्रमुख मांगें रखीं जिनमें पहली- विभागीय संविदा कर्मचारियों को निजी आउटसोर्सिंग फर्म में भेजने की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए। दूसरी- लंबित वेतन का शीघ्र भुगतान किया जाए। तीसरी- कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।




















