वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर मौलाना कल्बे जवाद ने जताई नाराजगी, उठाया ये सवाल

कल्बे जवाद

आरयू ब्यूरो, लखनऊ। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर मजलिसे उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना कल्बे जवाद ने नाराजगी जतायी है। मौलाना ने इसे अल्पसंख्यकों पर अत्याचार और उनके व्यक्तिगत मामलों में हस्तक्षेप बताया। साथ ही फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि नया वक्फ कानून इसी उद्देश्य से लाया गया है ताकि मुस्लिम वक्फ संपत्तियों को बर्बाद किया जा सके।

मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि उन्होंने हमेशा नए वक्फ कानून को “सांप का बिल” बताया था और अब ये बात सही साबित होती दिखाई दे रही। उन्‍होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब किसी हिंदू ट्रस्ट में मुस्लिम सदस्य नहीं हो सकता, तो फिर मुस्लिम वक्फ बोर्ड में कोई गैर-मुस्लिम सदस्य कैसे हो सकता है? उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट में किसी मुसलमान को शामिल नहीं किया गया। भारत में हिंदुओं के हजारों ट्रस्ट हैं, लेकिन किसी भी ट्रस्ट में कोई मुस्लिम सदस्य नहीं है।

नया वक्फ कानून वक्फ संपत्तियों के कल्याण के लिए नहीं…

इस दौरान मौलाना ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की नियुक्ति अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला है और संविधान की भावना के विपरीत है। नया वक्फ कानून वक्फ संपत्तियों के कल्याण के लिए नहीं लाया गया है, बल्कि इसका उद्देश्य कानूनी माध्यम से मुसलमानों की वक्फ संपत्तियों पर कब्जा करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ की जमीनों पर अवैध कब्ज़े हो रहे हैं, योजनाबद्ध तरीके से वक्फ संपत्तियों पर मंदिर बनाए जा रहे हैं और सरकारी कार्यालय बनाकर भी कब्जा किया जा रहा है। यदि सरकार वास्तव में मुसलमानों की संपत्तियों के प्रति ईमानदार है, तो सभी वक्फ जमीनों से अवैध कब्जे हटाए जाएं।

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मंदिरों को नोटिस नहीं, मजारों को…

भाजपा सरकार की मंशा पर निशाना साधते हुए कल्बे जव्‍वाद ने कहा कि सरकार मस्जिदों और मजारों को अवैध कब्जे के आधार पर गिरा रही है, लेकिन क्या किसी वक्फ या सरकारी जमीन पर बने किसी मंदिर को भी कभी हटाया गया है? उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि लखनऊ में हुसैनाबाद ट्रस्ट की जमीन पर देखते ही देखते कई मंदिर बन गए, लेकिन अब तक किसी मंदिर को कोई नोटिस नहीं भेजा गया। जबकि, किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज परिसर में मौजूद मजारों को हटाने के लिए लगातार नोटिस भेजे जा रहे हैं। यदि नए वक्फ कानून के माध्यम से सरकार का उद्देश्य वास्तव में वक्फ संपत्तियों का संरक्षण करना है, तो ट्रस्ट और अन्य सरकारी जमीनों पर हुए अवैध कब्जों तथा गैर-कानूनी रूप से बने मंदिरों को भी हटाया जाना चाहिए।

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