आरयू ब्यूरो, लखनऊ। मरीज अस्पताल में केवल इलाज कराने नहीं, बल्कि भरोसा लेकर आता है। ऐसे में डॉक्टरों का कर्तव्य है कि वे अपने ज्ञान और कौशल के साथ-साथ संवेदनशीलता को भी समान महत्व दें। कई बार डॉक्टर की मुस्कान, आत्मीयता और भरोसा दिलाने वाले शब्द मरीज के मानसिक संबल का कारण बनते हैं और उपचार को अधिक प्रभावी बनाते हैं।
उक्त बातें लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के 22वें दीक्षांत समारोह में सोमवार को संबोधित कर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कही। साथ रक्षा मंत्री ने चिकित्सा पेशे को मानवता की सेवा का सर्वोच्च माध्यम बताते हुए युवा डॉक्टरों को संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों के साथ कार्य करने की सीख दी। राजनाथ सिंह ने कहा कि डॉक्टर की वास्तविक पहचान उसकी डिग्री से नहीं, बल्कि मरीज के प्रति उसके व्यवहार, करुणा और सेवा भावना से होती है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जीन थेरेपी, सीएआर-टी सेल थेरेपी और आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के जरिए देश वैश्विक स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। ऐसे समय में नए डॉक्टरों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे आधुनिक तकनीक के साथ मानवीय मूल्यों को भी अपनाएं।
दीक्षांत समारोह में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 54 मेधावी छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक और 1708 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान कीं। समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।




















