आरयू ब्यूरो, लखनऊ। आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने यूपी के मुख्य सचिव को लेटर भेजकर देवीपाटन मंडल की मंडलायुक्त आइएएस दुर्गा शक्ति नागपाल के तत्काल स्थानांतरण और पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
पूर्व आइपीएस अमिताभ ठाकुर ने अपने पत्र में बताया कि इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सिविल जज और कमिश्नर के बीच हुई टेलीफोनिक बातचीत का स्वतः संज्ञान लिया है। अमिताभ ठाकुर ने मुख्य सचिव से मांग की है कि हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियों और निर्देशों के क्रम में आइएएस दुर्गा शक्ति नागपाल को तुरंत गोंडा मंडल के कमिश्नर पद से हटाया जाए। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारी का जिले या मंडल में बने रहना उचित नहीं है।
साथ ही उन्होंने महिला जज के साथ हुई बातचीत और उसके बाद के संपूर्ण घटनाक्रम की एक स्वतंत्र उच्च स्तरीय प्रशासनिक जांच कराने की भी मांग उठाई। इसके अलावा आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष ने शासन से ये भी आग्रह किया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
वहीं ये भी मांग की कि अदालतों में लंबित न्यायिक मामलों के संबंध में कार्यपालिका के प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा न्यायिक अधिकारियों से सीधे संपर्क या बातचीत करने को लेकर एक सख्त, पारदर्शी और स्पष्ट प्रोटोकॉल व प्रशासनिक दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता अक्षुण्ण रहे।
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ये मांग इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ द्वारा 21 अगस्त 2026 को पारित एक आदेश के खिलाफ उठाई गई है। दरअसल आदेश में न्यायालय ने गोंडा की सिविल जज और मंडलायुक्त के बीच हुई फोन वार्ता को न्याय-प्रशासन में अनुचित हस्तक्षेप माना है।
कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इसे एक न्यायिक अधिकारी को प्रभावित करने और न्यायिक प्रक्रिया में दखल देने का गंभीर प्रयास करार दिया है। हाई कोर्ट ने इस प्रकरण को न्याय-प्रशासन में सीधा हस्तक्षेप मानते हुए इसे आपराधिक अवमानना की सुनवाई के लिए सक्षम न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।



















