आरयू ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं और चयन प्रक्रिया को लेकर गुरुवार को आम आदमी पार्टी ने योगी सरकार पर निशाना साधा है। आप यूपी के सह प्रभारी दिलीप पाण्डेय ने योगी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में भर्ती के नाम पर जिस तरह से एक के बाद एक घोटाले सामने आ रहे हैं, उसने ये साबित कर दिया है कि यूपी में रिश्तेदारों व खास लोगों में नौकरियों की बंदरबांट हो रही है। साथ ही कहा कि भर्ती घोटालों में ज्यादातर नियुक्तियां भाजपा नेताओं और मंत्रियों के रिश्तेदारों की हुई हैं।
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दिलीप पाण्डेय ने गुरुवार को पार्टी कार्यालय पर आयोजित प्रेसवार्ता में योगी सरकार पर भर्ती परीक्षाओं और चयन प्रक्रिया में खुलेआम हो रहे भ्रष्टाचार और घोटालों का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भर्ती के नाम पर जिस तरह से एक के बाद एक घोटाले सामने आ रहे हैं, उसने ये साबित कर दिया है कि भाजपा सरकार पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों और हर उस गरीब नौजवान के खिलाफ है, जो अपनी मेहनत से अपनी किस्मत लिखना चाहता है।
इन्हें मिली नौकरियां
इस दौरान आप नेता ने कहा कि भर्ती घोटालों में ज्यादातर नियुक्तियां भाजपा नेताओं और मंत्रियों के रिश्तेदारों की हुई हैं। जिनके नाम बताते हुए कहा कि मुकुट बिहारी वर्मा की नातिन अंशिका गर्ग को नौकरी मिली। अजय मिश्र टेनी की सुपुत्री रश्मि मिश्रा को भी नौकरी दी गई। ‘संस्कृति सिंह’ नाम की महिला को नियम तोड़कर न सिर्फ नौकरी मिली बल्कि आउट ऑफ टर्न प्रमोशन तक दे दिया गया। साथ ही आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और परीक्षा कराने वाले संस्थानों का नेक्सस मिलकर युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रहा है।
क्लोन आईडी स्कैम
हमला जारी रखते हुए दिलीप पाण्डेय ने कहा कि 2022 से अब तक यूपी में भर्ती परीक्षाओं और चयन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। हाल ही में सामने आए क्लोन आईडी स्कैम में छह अलग-अलग जिलों में एक ही व्यक्ति ने अलग-अलग नाम और दस्तावेज़ लगाकर नौकरियां पा लीं। यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार के वटवृक्ष की एक शाखा है। उन्होंने याद दिलाया कि विधानसभा और विधान परिषद की भर्तियों में 20% नौकरियां सीधे-सीधे अधिकारियों, नेताओं और परीक्षा आयोजित करने वाले लोगों के रिश्तेदारों को मिलीं। हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले को ‘रिक्रूटमेंट स्कैम’ कहकर सरकार को फटकार लगाई और अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
कुचल दिया गया सरेआम आरक्षण
आप नेता ने कहा कि लखीमपुर कोऑपरेटिव सोसाइटी की भर्ती में नियम-कायदे ताक पर रखकर 27 में से 15 ठाकुर और चार ब्राह्मण भर्ती कर लिए गए, जबकि ओबीसी और एससी-एसटी को मिलने वाला आरक्षण सरेआम कुचल दिया गया। क्लर्क की 17 पोस्ट में एक भी एससी-एसटी की नियुक्ति नहीं हुई, जबकि नियम के अनुसार चार नियुक्तियां होनी चाहिए थीं। इसी तरह बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की भर्तियों में 11 में से 15 चयनित उम्मीदवार ठाकुर जाति के निकले। दिलीप पाण्डेय ने कहा कि यह भाजपा की जातिवादी मानसिकता और आरक्षण विरोधी नीतियों का जीता-जागता सबूत है।




















