आरयू ब्यूरो, लखनऊ। यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान की मुश्किलें आने वाले दिनों में और बढ़ सकती हैं। प्रवर्तन निदेशालय ने आजम के मंत्री कार्यकाल के दौरान जल निगम में हुए सभी कार्यों का विस्तृत ब्योरा राज्य सरकार से तलब किया है। केंद्रीय जांच एजेंसी अब यह खंगालने में जुटी है कि मंत्री रहते हुए किन-किन फर्मों को प्राथमिकता के आधार पर ज्यादा काम बांटे गए थे।
ईडी द्वारा जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी की जांच के दौरान यह तथ्य सामने आए हैं कि वर्ष 2012 से 2019 के बीच जल निगम के कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गई थीं। बता दें कि आजम खान साल 2012 से 2017 तक उत्तर प्रदेश सरकार में नगर विकास मंत्री थे, जिसके अंतर्गत जल निगम का प्रभार भी आता था। इसके बाद वर्ष 2019 में जल जीवन मिशन की स्थापना होने के बाद से कार्य उसके तहत कराए जाने लगे।
प्रवर्तन निदेशालय ने राज्य सरकार से मांग की है कि वह आजम खान के कार्यकाल से जुड़े सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए। एजेंसी ने ये भी पूछा है कि उस दौरान कितनी निविदाएं स्वीकृत हुईं, प्रचार-प्रसार का काम किन फर्मों को दिया गया, कितना वित्तीय भुगतान हुआ और कुल कितने अनुबंध किए गए। इसके अलावा उस समयावधि में जल निगम में तैनात रहे अधिकारियों की सूची भी मांगी गई है।
दूसरी ओर इस मामले में जांच का दायरा बढ़ाते हुए ईडी ने जौहर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर जहीरूद्दीन से लंबी और गहन पूछताछ की। वर्तमान में इस यूनिवर्सिटी में पूर्व मंत्री आजम खान चांसलर और उनके बेटे मोहम्मद अब्दुल्ला आजम खान प्रो-चांसलर के रूप में हैं। ईडी के अधिकारियों ने कुलपति से जौहर ट्रस्ट में उनकी भूमिका और उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर सवाल किए।
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जांच एजेंसी ने यूनिवर्सिटी में सरकारी विभागों की धनराशि से बने भवनों के संबंध में भी जानकारी जुटाई। इसके अलावा, लगातार चार समन मिलने के बाद भी पेश न होने वाले ए एंड एस इंटरप्राइजेज के सलीम ने भी बृहस्पतिवार को ईडी के समक्ष हाजिर होकर अपना बयान दर्ज कराया। दोनों से करीब आठ घंटे तक चली मैराथन पूछताछ के बाद उन्हें जाने दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, ईडी अगले सप्ताह जौहर ट्रस्ट के अन्य सभी ट्रस्टियों से भी पूछताछ कर सकती है।




















