आखिरकार चार साल बाद यूपी को मिला परमानेंट DGP

डीजीपी
यूपी डीजीपी राजीव कृष्ण।

आरयू ब्यूरो, लखनऊ। चार साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार उत्तर प्रदेश को अपना स्थायी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) मिल गया है। आइपीएस राजीव कृष्ण जो अभी तक कार्यवाहक डीजीपी के तौर पर काम कर रहे थे, उन्हें राज्य का स्थायी डीजीपी नियुक्त किया गया है। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा सौंपी गई सूची पर सरकारी स्तर पर विचार-विमर्श पूरा होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मौजूदा कार्यवाहक पुलिस मुखिया को स्थायाी डीजीपी के रूप में नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है।

इस संबंध में एक आदेश जारी कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि 26 मई को हुई एक बैठक के बाद यूपीएससी ने राज्य सरकार को नामों का एक पैनल भेजा है, जिसमें 1990-बैच की आइपीएस अधिकारी रेणुका मिश्रा, 1991 -बैच के आइपीएस अफसर पीयूष आनंद और राजीव कृष्ण शामिल थे। इनमें से राजीव कृष्ण का नाम सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा था। जिसके बाद मुख्यमंत्री योगी ने भी उनके नाम को मंजूरी दे दी।

कहा तो ये भी जा रहा है कि सीएम योगी की पहली और आखरी पंसद राजीव कृष्ण ही थे, इसलिए उन्होंने राजीव को ही प्रदेश का स्थायी डीजीपी बनाने का फैसला लिया।
दरअसल आईपीएस राजीव कृष्ण एक जून 2025 से कार्यवाहक डीजीपी के तौर पर काम कर रहे थे। 1991-बैच के आइपीएस अधिकारी राजीव कृष्ण पुलिस विभाग में अपने व्यापक प्रशासनिक और फील्ड अनुभव के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने राज्य के कई महत्वपूर्ण जिलों और जोनों में अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं।

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11 मई 2022 को मुकुल गोयल को डीजीपी पद से हटाए जाने के बाद से उत्तर प्रदेश में लगातार कार्यवाहक डीजीपी की तैनाती हो रही थी। डीएस चौहान, आरके विश्वकर्मा, विजय कुमार, प्रशांत कुमार के बाद राजीव कृष्ण बीते चार सालों में उत्तर प्रदेश पुलिस के पांचवें कार्यवाहक डीजीपी थे। अब जाकर राजीव कृष्ण को प्रदेश का स्थायी डीजीपी नियुक्त किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और यूपीएससी के नियमों के अनुसार, एक स्थायी डीजीपी का कार्यकाल कम से कम दो साल का होता है। नतीजतन, अपनी नियुक्ति के बाद, राजीव कृष्ण 2028 तक इस पद पर बने रह सकते हैं। ऐसे में राजीव कृष्ण के सामने 2027 के विधानसभा चुनाव में कानून-व्यवस्था संभालना सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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