बदला स्टाइल, एलडीए में अब फाइलें जलाई नहीं दफनाई जा रही, देखें वीडियो

एलडीए में फाइलें दफनाई
पार्किंग निर्माण से पहले गड्ढें में फाइल डालकर उसे पाटते मजदूर।

आरयू एक्‍सक्‍लूसिव, 

लखनऊ। अफसरों के लाख दावों के बाद भी योगी सरकार में लखनऊ विकास प्राधिकरण में भ्रष्‍टाचार और मनमानी रूकने का नाम नहीं ले रही है। एलडीए मुख्‍यालय में बने बारादरी लॉन के किचन में छिपाकर सैकड़ों बोरों में रखी गयी फाइलों को आज एलडीए में छुट्टी के दिन पास के ही मैदान में गड्ढा खोदकर दफना दिया गया।

यह हाल तब है जब एलडीए के मुख्‍यालय में पहले दो बार संदिग्‍धहाल में लग चुकी आग की जांच अब तक एफएसएल से नहीं कराई जा सकी है। वहीं फाइल गायब होने की बात पर एलडीए सचिव संबंधित कर्मचारियों पर एफआईआर तक दर्ज कराने की बात कह चुके हैं। समझा जा रहा है कि आग की घटनाओं के चलते किरकिरी होने के बाद अब एलडीए के भ्रष्‍ट लोगों ने फाइलों को ठिकाने लगाने का नया तरीका खोज लिया है।

छुट्टी के दिन कुछ इस तरह का था एलडीए मुख्‍यालय का नजारा-

आज नई बिल्डिंग के सामने स्थित मैदान में करीब दस फुट गहरे लंबे व चौड़ें गड्ढे को फाइलों व अन्‍य कागजातों से भरा जा चुका था। कुछ मजदूर उसपर मिट्टी डाल रहे थे। गड्ढे के बाहर ही मिट्टी का ढेर लगा था। मजदूरों ने बताया कि गड्ढे में उतनी ही फाइलों व अन्‍य कागजात डाला गया हैं, जितनी बाहर मिट्टी बची है।

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चंद कदमों की दूरी पर बारादरी लॉन के लग्‍जरी किचन पर कुछ मजूदर हथौड़ा चला रहे थे, जबकि आधा दर्जन से अधिक मजदूर अब भी फाइलों को कूड़ें की तरह बोरों में भर रहे थे। लगभग पचास बोरों में रद्दी की तरह फाइलों को ठूंसने के बाद उन्‍हें बाहर ही रखवा दिया गया था। भीगने के चलते बड़ी संख्‍या में फाइलें खराब हो चुकी थी।

भ्रष्‍टाचार के लिए बदनाम एलडीए में इतने बड़ें पैमाने पर सरकरी फाइलों को किसके आदेश पर दफन कराया जा रहा है इसका जवाब मौके पर मौजूद एलडीए के जेई राकेश चौधरी नहीं दे सके। जबकि जानकार बताते है कि बिना कमेटी बनाए और फाइलों की लिस्टिंग किए इस तरह से सरकारी फाइलों को नष्‍ट नहीं किया जा सकता।

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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लॉन के किचन को लंबे समय से गड़बड़ी करने के बाद फाइलों को डंप करने का अड्डा बनाया गया था। 2015 में दर्जनों अलमारियों की फाइलों को तत्‍कालीन एलडीए जेई सीके चतुर्वेदी ने रखवाया था। उसके बाद कुछ महीने पहले भी बोरियों में भरकर हजारों फाइलें किचन में रखी गयी थी। जिसमें बड़ी संख्‍या में फाइलें साल 2000 के बाद की थी।

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…तो इसलिए गड्ढें का लिया सहारा

आग लगाने पर धुंआ होने पर पकड़ें जाने के डर से सेकेंड सर्टडे और संडे की छुट्टी में गड्ढा खोदकर फाइलों को ठिकानें लगाने का प्‍लॉन था। जिसके लिए सुबह आठ बजे से ही गड्ढा खोदने और फाइलों को उसमें डालने का काम करीब दर्जन भर मजदूर कर रहे थे।

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इस बात को यहां से भी बल मिलता है कि जहां फाइलों को दफन किया गया है। उसके ऊपर पार्किंग भी बननी है। मौके पर मौजूद जेई ने बताया कि पार्किंग के लिए किचन तोड़ने के साथ ही उसकी जमीन को मैदान में मिलाकर पार्किंग बनाई जा रही है। कुछ दिन पहले ही इसका टेंडर भी हो चुका है।


एलडीए की करीब 85 प्रतिशत फाइलों को स्‍कैन कर डॉटा तैयार किया जा चुका है। इसके साथ ही 50 साल पुरानी समेत कुछ अन्‍य फाइलों को नियमों के अनुसार निस्‍तारित करने को कहा गया था। नियमों के विरूद्ध कुछ भी किया गया है तो इसकी जांच कराई जाएगी।  प्रभु एन सिंह, एलडीए उपाध्‍यक्ष