झारखंड के पूर्व CM शिबू सोरेन का निधन, दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में ली अंतिम सांस

शिबू सोरेन
शिबू सोरेन। (फाइल फोटो)

आरयू वेब टीम। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और राज्य के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके शिबू सोरेन का सोमवार को निधन हो गया है। 81 वर्ष के शिबू सोरेन ने दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह पिछले कई महीनों से गंभीर रूप से बीमार थे और अंतिम समय में जीवन रक्षक प्रणाली पर थे। पूर्व सीएम के निधन की खबर से राजनीतिक गलियारे में शोक की लहर दौड़ गई।

शिबू सोरेन को जून 2025 के अंत में गुर्दे की गंभीर बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद उन्हें स्ट्रोक भी हुआ, जिससे उनकी स्थिति और बिगड़ गई। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार सोमवार सुबह 8:56 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उनके निधन की पुष्टि करते हुए उनके बेटे और झारखंड के मौजूदा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने एक भावुक पोस्ट कर बताया’आदरणीय दिशेम गुरु हम सबको छोड़कर चले गए हैं। आज मैं शून्य हो गया हूं’।

शिबू सोरेन ने चार दशक से अधिक समय तक झामुमो की बागडोर संभाली और पार्टी को जमीनी स्तर पर संगठित किया। 1987 में पार्टी की कमान संभालने के बाद उन्होंने उसे एक मजबूत जन आंदोलन में बदल दिया। उनकी नेतृत्व क्षमता और संघर्षशील छवि ने उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में भी पहचान दिलाई। वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने और साथ ही केंद्र सरकार में कोयला मंत्री जैसे अहम पदों पर भी रहे। उनके जीवन का सबसे बड़ा सपना था, अलग झारखंड राज्य का निर्माण, जिसे उन्होंने लंबी लड़ाई के बाद साकार होते देखा।

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दरअसल, झारखंड की सियासत में शिबू सोरेन गुरुजी थे। शिबू सोरेन को बच्चा हो या जवान सभी ‘गुरुजी’ के नाम से पुकारते थे। उन्होंने झारखंड के आदिवासी समुदाय को महाजनों के शोषण से मुक्ति दिलाने के लिए 1970 के दशक में आंदोलन शुरू किया था। उनके पिता सोबरन मांझी की हत्या ने उन्हें सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष की राह पर ला खड़ा किया। साल 1973 में उन्होंने जेएमएम की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने झारखंड को अलग राज्य बनाने के लिए दशकों तक संघर्ष किया। उनके संघर्ष का ही परिणाम है कि झारखंड साल 2000 में बिहार से अलग हुआ।

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