आरयू ब्यूरो, लखनऊ। अवैध निर्माण-प्लॉटिंग को संरक्षण देने के लिए बदनाम लखनऊ विकास प्राधिकरण के अफसर अगर चाह लें तो आम जनता के लिए नासूर बनने से पहले ही इन्हें तोड़ा जा सकता है। यह बात आपको कुछ हैरान कर सकती है, लेकिन है बिल्कुल सच। एलडीए की इमेज के विपरित आज ऐसा ही एक दुर्लभ मामला लखनऊ के सबसे ज्यादा जानलेवा हादसों के गवाह प्रवर्तन जोन छह से सामने आया है।
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जोन छह के महानगर इलाके में न सिर्फ एक अवैध अपार्टमेंट का निर्माण शुरू होने के कुछ दिनों बाद ही संबंधित इंजीनियर ने नोटिस काट दी, बल्कि अमूमन सालों तक सुनवाई में अटके रहने वाले अवैध अपार्टमेंट के मामले को विहित प्राधिकारी के कोर्ट से भी निपटाते हुए उसे आज तोड़ दिया गया। ध्वस्तीकरण के दौरान निर्माणकर्ता के विरोध का भी एलडीए की टीम को सामना करना पड़ा। साथ ही यह कार्रवाई कितनी तेजी से की गयी कि इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि अवैध अपार्टमेंट का एक भी फ्लोर खड़ा नहीं हो सका था।
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फिर से प्रवर्तन जोन छह का…
पूर्व में हटाए जाने के बाद एक दिन पहले ही फिर से प्रवर्तन जोन छह का चार्ज पाने वाले जोनल अधिकारी प्रभाकर सिंह ने गुरूवार रात करीब नौ बजे जारी एक प्रेस नोट के माध्यम से इस अवैध निर्माण के पिलर तोड़ने की जानकारी मीडिया को दी है।
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सतीश कुमार ने पास कराया था नक्शा, लेकिन…
प्रभाकर सिंह के मुताबिक सतीश कुमार व अन्य महानगर के न्यू हैदराबाद स्थित श्याम लाल की बगिया में करीब दो सौ वर्गमीटर के प्लॉट पर स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण करा रहे थें। जोनल अधिकारी ने आगे कहा कि इस अवैध निर्माण के खिलाफ विहित न्यायालय द्वारा वाद योजित करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश दिया गया था।
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इसी आदेश के अनुपालन में आज उनकी टीम के एई सतीश यादव के नेतृत्व में जेई सुनील कुमार व के.पी. सिंह की टीम ने अवैध निर्माण ध्वस्त कराया है। हालांकि अपने अभियंताओं का नाम बताने वाले जोनल अधिकारी ने अवैध निर्माण के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाली नोटिस काटने की डेट से लेकर सीलिंग व ध्वस्तीकरण की तिथि मीडिया को नहीं बतायी है।
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इसी तेजी से थमेगा अवैध निर्माण, अफसरों का कार्यकाल भी नहीं होगा कलंकित!
ध्वस्तीकरण के बाद माना जा रहा कि महानगर के उक्त अवैध अपार्टमेंट के मामले में प्रवर्तन दल ने जितनी तेजी दिखाई अगर उसकी आधी भी जोन छह समेत अन्य जोन में हो रहे अवैध निर्माण-प्लॉटिंग रोकने में दिखा दें तो सूबे की राजधानी की सूरत बर्बाद होने से बच जाएगी।
वहीं इससे न सिर्फ आम जनता को राहत मिलेगी, बल्कि एलडीए के इंजीनियर व अधिकारियों पर भी अवैध निर्माण का ठेका लेकर उसे हर तरह के संरक्षण देने का कलंक नहीं लगेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे जुड़े विभाग की छवि चमकेगी सो अलग। हालांकि इन सबके लिए एलडीए के अफसरों को न सिर्फ पूरी तरह ईमानदार रहना होगा, बल्कि कुर्सी जाने का झटका झेलने के लिए भी तैयार रहना पड़ेगा।




















