आरयू ब्यूरो, लखनऊ। एलडीए भले ही अपने प्लॉटों की फर्जी रजिस्ट्री कैंसिल नहीं करा पा रहा, लेकिन उसके भूखंडों की जालसाजों द्वारा फर्जी रजिस्ट्री कराने का क्रम रूकने का नाम नहीं ले रहा। ऐसा ही एक मामला फिर सामने आया है, जिसमें जालसाजों ने अपनी ही संपत्ति के प्रति बेपरवाह एलडीए को ठेंगा दिखाते हुए गोमतीनगर के विकास खंड स्थित करीब ढाई करोड़ रुपए की कीमत वाले तीन हजार वर्ग फुट के प्लॉट की फर्जी रजिस्ट्री करा खरीद-बेच कर ली है।
करीब चार महीना पहले हुई इस रजिस्ट्री का मामला खुलने के बाद एलडीए सचिव पवन कुमार गंगवार के आदेश पर योजना का काम देख रहे बाबू मोहम्मद शमी की तहरीर पर प्लॉट को फर्जी तरीके से खरीद व बेचने में शामिल दो आरोपित के अलावा दो गवाहों के खिलाफ भी गोमतीनगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया है।
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एलडीए सचिव पवन कुमार गंगवार ने गुरुवार को बताया कि विकास खंड स्थित प्लॉट नंबर 3/214 ए को हरियाणा के रोहतक निवासी चंद्रशेखर सिंह ने गोरखपुर जिले के झुगिया बाजार निवासी विष्णु प्रताप तिवारी को फर्जी रजिस्ट्री के जरिये फरवरी में बेचा गया था। जिसमें गोरखपुर के ही पुनीत तिवारी व त्रिभुवन पांडेय ने गवाही दी थी। शिकायत के बाद कराई गयी जांच में शिकायत सही मिलने पर चंद्रशेखर सिंह, विष्णु प्रताप तिवारी, पुनीत तिवारी व त्रिभुवन पांडेय के खिलाफ आइपीसी की धारा 419, 420, 467, 468 व 471 के तहत गोमतीनगर कोतवाली में एफआइआर कराई गई है।
गोमतीनगर के 22 प्लॉटों की फर्जी रजिस्ट्री मामले में भी मुकदमें की तैयारी
विकास खंड के प्लॉट के प्रकरण के बाद अब एलडीए गोमतीनगर के उन 22 प्लॉटों की फर्जी रजिस्ट्री के मामले में भी मुकदमा कराने तैयारी कर रहा है जिसकी शिकायत कुछ महीना पहले की गयी थी। कहा जा रहा है जांच में 22 में से 21 प्लॉटों की फर्जी रजिस्ट्री की बात सामने आयी है। ये भूखंड वास्तु खंड, विकल्प खंड, विराज खंड, विनम्र खंड, विक्रांत खंड व विराट खंड में स्थित हैं। इस बारे में एलडीए सचिव पवन कुमार गंगवार का कहना है कि मामलों की जांच कराई गयी है, वर्तमान में योजना का काम देख रहें ओएसडी अमित राठौर छुट्टी पर हैं, उनके लौटने पर कुछ औपचारिकताएं पूरी करने के बाद एफआइआर कराई जाएगी। फर्जी रजिस्ट्री करने व कराने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
एलडीए में सक्रिय फर्जी रजिस्ट्री गैंग के सदस्य!
एलडीए के अफसर भले ही फर्जी रजिस्ट्री का मामला सामने आने के बाद मुकदमा दर्ज कर आगे कार्रवाई करने की बात कहतें हों, लेकिन लगातार इस तरह के मामले सामने आने के बाद एक बात साफ हो चुकी है। फर्जी रजिस्ट्री गैंग के सदस्य न सिर्फ अब भी एलडीए में सक्रिय हैं, बल्कि उनकी रणनीति भी अफसरों से कई कदम आगे हैं।
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जानकारों के अनुसार यही वजह है कि यह गैंग अफसरों से पहले एलडीए के गुमनाम प्लॉटों को ढ़ूढ लेता है, बल्कि अधिकारियों को भनक भी नहीं लगती और इनकी रजिस्ट्री करा दे रहा।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी उठ रहें सवाल
पिछले रिकॉर्ड को देखें तो ऐसे मामलों में नाम मात्र गिरफ्तारी करने वाली गोमतीनगर पुलिस की कार्यप्रणाली भी सवाल उठ रहें हैं। सूत्रों का कहना है कि पुलिस अगर गहराई से जांच करे तो उसके हाथ जरूर एलडीए के ऐसे कर्मियों तक भी पहुंच जाएंगे जो बिना अपनी कलम फंसाए फर्जी रजिस्ट्री कराने वाले गैंग की सहायता कर रहें।
वहीं कुछ समय पहले गोमतीनगर कोतवाली का चार्ज संभालने वाले इंस्पेक्टर दिनेश चंद्र मिश्रा का इस मामले में कहना है कि मुकदमों की जांच की जा रही है, पूर्व में कुछ आरोपितों की गिरफ्तारी भी हुई है, फर्जी रजिस्ट्री कराने में शामिल अन्य को भी जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा।




















