आरयू वेब टीम। महिला आरक्षण बिल और संसदीय सीटों के विस्तार (परिसीमन) को लेकर देश की सियासत गरमा गई है। गुरुवार से शुरू हो रहे संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र से ठीक पहले बुधवार को दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं की बड़ी बैठक हुई। इस बैठक में राहुल गांधी, उमर अब्दुल्ला, तेजस्वी यादव और संजय सिंह समेत विपक्ष के तमाम दिग्गज जुटे। बैठक के बाद खड़गे ने स्पष्ट किया कि विपक्ष महिला आरक्षण का समर्थन करता है, लेकिन सरकार की मंशा और ‘परिसीमन’ के पेच पर उसे गंभीर आपत्तियां हैं।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने बैठक के बाद मीडिया से कहा, “हम सभी महिला आरक्षण बिल के पक्ष में हैं। हमने हमेशा इसका समर्थन किया है, लेकिन सरकार इसे जिस तरह से लाई है, वह पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है। सरकार विपक्षी दलों को दबाने के लिए ऐसा कर रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जनगणना तक स्पष्ट नहीं की है और परिसीमन के नाम पर ‘ट्रिक्स’ खेल रही है। खड़गे ने असम और जम्मू-कश्मीर का हवाला देते हुए कहा कि सरकार पहले भी इन मुद्दों पर धोखा दे चुकी है।
वहीं विपक्षी दलों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि वे संसद में सरकार के ‘परिसीमन बिल’ का कड़ा विरोध करेंगे। विपक्ष का मानना है कि सरकार जानबूझकर तीन अलग-अलग मुद्दों- महिला आरक्षण, राष्ट्रीय परिसीमन और लोकसभा सीटों में वृद्धि को आपस में मिला रही है ताकि जनता में भ्रम पैदा किया जा सके। खड़गे ने कहा कि संविधान की शक्तियों को कार्यपालिका द्वारा छीना जा रहा है और वे संसद में एकजुट होकर इसके खिलाफ लड़ेंगे।
खड़गे के आवास पर हुई इस बैठक में विपक्षी एकता की मजबूत झलक दिखी। इसमें कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल, डीएमके के टीआर बालू, आरजेडी के तेजस्वी यादव, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले, आप के संजय सिंह और टीएमसी के डेरेक ओ’ब्रायन सहित वामपंथी दलों और अन्य क्षेत्रीय दलों के नेता शामिल हुए। इन सभी ने आगामी सत्र के लिए साझा रणनीति पर मुहर लगाई।
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गौरतलब है कि 16 अप्रैल से शुरू हो रहे विशेष सत्र में सरकार 2029 के लोकसभा चुनावों से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के संवैधानिक संशोधन पर जोर देगी। वहीं, विपक्ष का कहना है कि पुराने संशोधनों को लागू किया जाए और परिसीमन के नाम पर सीटों के गणित में बदलाव कर दक्षिण भारतीय राज्यों या विपक्ष शासित राज्यों के प्रतिनिधित्व के साथ खिलवाड़ न हो।




















