आरयू वेब टीम। संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण कानून में संशोधन से जुड़े 3 विधेयक लोकसभा में पेश किए गए। इन विधेयकों पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सदन को संबोधित किया। पीएम ने कहा “भारत के संसदीय लोकतंत्र का इतिहास में ये अहम पल है। जरूरत तो ये थी कि 25-30 साल पहले ही हम इसे लागू कर देते और आज परिरक्वता तक पहुंचा देते। समय-समय पर इसमे सुधार भी होते।”
महिला आरक्षण बिल पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जिन्हें इस काम में राजनीति की बू आ रही है वो पिछला इतिहास देख लें। मोदी ने कहा कि मुझे याद है तब तो मैं शासकीय व्यवस्था की राजनीति में नहीं था। मैं एक संगठन के कार्यकर्ता के नाते काम करता था। उस समय एक चर्चा सुनने को मिलती थी गलियारों में कि देखिए ये कैसे लोग हैं। साथ ही कहा कि क्या है तो मैं आरक्षण देना है तो बहुत आराम से दे देते हैं, लेकिन आप कह रहे हैं तो कह रहे हैं पंचायतों में आरक्षण देना है तो आराम से देते हैं क्योंकि उसमें उनको खुद का पद जाने का डर नहीं लगता है। उसको लगता है हम सुरक्षित हैं वहां दे दो। यह उस समय गलियारों में बहुत चर्चा थी कि बोले कभी नहीं करेंगे यहां बैठे हुए क्यों?
पंचायती चुनाव व्यवस्थाओं में जीत…
पीएम ने कहा आज से 25 साल, 23 साल पहले जिसने भी विरोध किया वो विरोध राजनीतिक थे आज ऐसा समझने की गलती मत करना पिछले 25 से 30 साल में ग्रासरूट लेवल पे पंचायती चुनाव व्यवस्थाओं में जीत करके आई हुई बहनों में एक पॉलिटिकल कॉन्शसनेस है। वे ओपिनियन मेकर है ग्रास लेवल पे। 30 साल पहले वह शांत रहती थी। बोलती नहीं थी। समझती थी। बोलती नहीं थी। आज वो वोकल है और इसलिए अब जो भी पक्ष विपक्ष होगा वो जो लाखों बहनें कभी न कभी पंचायत में काम कर चुकी हैं। प्रतिनिधित्व कर चुकी है।
लाखों बहनें ग्रास रूट लेवल पर बन चुकी लीडर
प्रधानमंत्री ने कहा कि जनता के सुख-दुख की समस्याओं को गहराई से देखा है। वो आंदोलित है। वो कहती है कि झाड़ू कचरा वाले काम में तो हमें जोड़ देते हो। वो तो परिवार में भी पहले होता था। अब हमें निर्णय प्रक्रिया में जोड़ो। न्याय विधानसभा में और पार्लियामेंट में होती है इसलिए मैं राजनीतिक जीवन में जो लोग प्रगति चाहते हैं, मैं किसी भी सांसद की बात करता हूं, किसी भी एमएलए की बात करता हूं। ये दल वो दल की बात मैं नहीं कर रहा हूं। जो भी राजनीतिक जीवन में सफलतापूर्वक आगे बढ़ना चाहते हैं, उनको ये मान के चलना पड़ेगा कि पिछले 25 से 30 साल में लाखों बहनें ग्रास रूट लेवल पर लीडर बन चुकी हैं। अब उनके अंदर सिर्फ यहां 33 प्रतिशत का नहीं वहां भी वह आपके फैसलों को प्रभावित करने वाली है। और इसलिए जो आज विरोध करेंगे उसको लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी। लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी।
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दरअसल महिला आरक्षण विधेयक से जुड़े तीन विधेयक गुरुवार को लोकसभा में पेश हुए। वोटिंग के बाद इन संशोधन विधेयकों पर चर्चा शुरू हुई। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 पेश किए, वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संघ राज्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया। संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026’ पेश करने के प्रस्ताव के पक्ष में 251 वोट और विरोध में 185 वोट पड़े।
तीनों विधेयकों को भारत के संघीय ढांचे पर हमला: विपक्ष
वहीं विपक्ष की पार्टियों ने कहा कि वह महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन करते हैं लेकिन इसे पेश करने के तरीके पर उन्हें आपत्ति है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रमुक और अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने विधेयकों को ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए इन्हें पेश करने के समय पर सवाल खड़े किए। कांग्रेस के के.सी. वेणुगोपाल ने तीनों विधेयकों को भारत के संघीय ढांचे पर हमला बताते हुए कहा कि वास्तव में विधेयक इस समय लाने का क्या मकसद है। उन्होंने कहा कि संसद के दोनों सदनों ने सर्वसम्मति से 2023 में ही महिला आरक्षण विधेयक पारित कर दिया था तो सरकार ने उसी समय इसे लागू क्यों नहीं किया? वेणुगोपाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘आप 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर डरे हुए हैं। आप असंवैधानिक विधेयक ला रहे हैं। इन्हें वापस लिया जाना चाहिए।’




















