आरयू वेब टीम। दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट परिसर के पास विरोध प्रदर्शन करते समय हिरासत में लिए गए लगभग 50-60 वकीलों को भारत के मुख्य न्यायाधीश के दखल के बाद कुछ घंटों बाद रिहा कर दिया गया। जंतर -मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी और इसी दौरान ये गिरफ्तारियां हुईं।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा सीजेआइ को लेटर लिखकर हिरासत में लिए गए वकीलों के मामले में दखल की मांग करने के बाद उन्हें रिहा किया गया। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश ने अधिकारियों से हिरासत में लिए गए वकीलों को रिहा करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स -ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट देवव्रत ने भी पुष्टि की कि सीजेआइ ने अधिकारियों को वकीलों को रिहा करने का निर्देश दिया था।
एससीबीए के प्रेसिडेंट प्रदीप राय ने दिन में करीब 11:30 बजे एक्स पर एक पोस्टकर यह मुद्दा उठाया और सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को उनके चैंबर से हिरासत में लिए जाने की खबरों को बेहद परेशान करने वाला बताया। इस बीच एससीबीए की मानद सचिव प्रज्ञा बघेल ने सीजेआइ को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट परिसर के बाहर शांतिपूर्ण विरोध कर रहे वकीलों को हिरासत में लिए जाने के मामले में तुरंत दखल देने की मांग की।
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अपने पत्र में बघेल ने कहा कि कई सीनियर वकीलों और अन्य वकीलों को कथित तौर पर पुलिस की जरूरत से ज्यादा ताकत का इस्तेमाल करके हिरासत में लिया गया। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन ने इस कथित कार्रवाई की निंदा करते हुए और “गहरी चिंता” जाहिर करते हुए एक प्रस्ताव पास किया है। एससीबीए ने सीजेआइ से अपील की कि वे संबंधित अधिकारियों से बात करके हिरासत में लिए गए वकीलों की जगह और सुरक्षा का पता लगाएं। उन्हें कानूनी मदद मिलनी सुनिश्चित करें और उन लोगों को रिहा करवाएं जिन्हें हिरासत में लेने का कोई कानूनी आधार नहीं था।




















