आरयू ब्यूरो, लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-कार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले के संविधान की प्रस्तावना पर दिए गए बयान पर सियासत तेज है। इस बीच यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी है। बसपा मुखिया ने कहा कि समय-समय पर संविधान में गैर जरूरी परिवर्तन किए गए हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान की मूल भावना प्रस्तवान में दर्शया गया है उसमें छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए।
बसपा सुप्रीमो मायावती ने शनिवार को प्रेसवार्ता कर संविधान पर छिड़ी बहस को लेकर भाजपा के साथ कांग्रेस को भी लपेटा। मायावती ने कहा कि ऐसा लगता है कि बसपा को इन पार्टियों के खिलाफ अपनी आवाज देशभर में उठानी पड़ेगी। साथ ही कहा कि दोनों पार्टियों के दिल में कुछ और और जुबान पर कुछ और होता है। पार्टियों को अपने संकीर्ण विचार से ऊपर उठकर संविधान से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए।
मायावती ने आगे कहा कि बाबा साहब के संविधान पर कांग्रेस और भाजपा ने अपना विश्वास नहीं जताया है। संविधान पर भाजपा और कांग्रेस ने ठीक से अमल नहीं किया, पार्टी अपनी-अपनी पार्टी की विचारधारा अपनाती है। दोनों पार्टी दोहरे चरित्र अपनाकर एक हो जाती हैं। अगर ये संविधान विरोधी चेहरे को नहीं बदलेंगे तो हमें आना होगा।
साथ ही बसपा प्रमुख ने कहा कि देश के कई राज्यों में भाषा के नाम पर राजनीति ठीक नहीं है। सभी भाषाओं को सम्मान देना चाहिए। सरकार और पार्टियों में टकराव होना ठीक नहीं है। वहीं मायावती ने बिहार में वोटर लिस्ट वाले मामले पर कहा कि चुनाव आयोग को अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहिए और पार्टियों को विश्वास में लेना चाहिए।
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बता दें कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने 27 जून 2025 को दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान संविधान की प्रस्तावना से समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्दों को हटाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि ये शब्द 1975 के आपातकाल के दौरान 42वें संशोधन के जरिए संविधान में शामिल किए गए थे और इन्हें कृत्रिम मानते हुए हटाने की आवश्यकता है।




















