आरयू ब्यूरो, लखनऊ। ज्योतिर्मठ के प्रमुख शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शुक्रवार को अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में वित्तीय अनियमितता मामले पर एक बार फिर सरकार पर हमला बोला है। साथ ही दर्ज प्राथमिकी पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसमें सिर्फ छोटे कर्मचारियों के नाम शामिल किए गए हैं, जबकि इसके लिए जिम्मेदार बड़े लोगों को छोड़ दिया गया है।
संभल में अपनी ‘गौ धर्म यात्रा’ के दौरान मीडिया से बात करते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, ‘चंदे की चोरी के बारे में क्या कहा जाए? राम मंदिर के मामले में शुरू से ही मनमाने फैसले लिए गए। न तो शास्त्रों, न वेदों और न ही धार्मिक गुरुओं की सलाह का पालन किया गया। ट्रस्ट में राजनीतिक नेताओं द्वारा चुने गए लोगों को शामिल किया गया, जबकि संतों, ऋषियों और पुजारियों को दूर रखा गया।’ साथ ही कहा कि ‘अगर सब कुछ निष्पक्ष तरीके से करना होता, तो ट्रस्ट की जिम्मेदारी चारों शंकराचार्यों, रामानंदाचार्य और अन्य धार्मिक गुरुओं को सौंपी जा सकती थी। इसके बजाय, भरोसेमंद राजनीतिक सहयोगियों को नियुक्त किया गया, जिससे शुरू से ही उनकी मंशा साफ हो गई थी।’
वहीं राम मंदिर दान में कथित हेराफेरी के मामले में दर्ज प्राथमिकी का जिक्र करते हुए शंकराचार्य ने कहा, ‘हमने सुना है कि प्राथमिकी उन लोगों के खिलाफ दर्ज की गई है, जिन्होंने नोट गिने थे। उन्होंने तो बस नोटों को सीधा किया, गिना और उनकी गड्डियां बनाईं। हमें उस बड़ी चोरी के बारे में बताइए जो बाद में हुई। नोट गिनने वाला व्यक्ति अगर चोरी भी करे, तो ज्यादा से ज्यादा कुछ नोट ही ले सकता है। बड़े पैमाने पर चोरी तो प्रभावशाली लोग करते हैं। उनके खिलाफ कोई प्राथमिकी नहीं है।’
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इस आरोप को खारिज करते हुए कि यात्रा का मकसद किसी राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाना है, उन्होंने कहा कि कोई भी इस अभियान से राजनीतिक फायदा उठा सकता है। शंकराचार्य ने कहा, ‘अगर भाजपा गाय को ‘राजमाता’ घोषित करती है तो उसे सबसे ज्यादा फायदा हो सकता है, लेकिन वह ऐसा नहीं कर रही है। अगर कोई दूसरी पार्टी राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है, तो हम उन्हें रोक नहीं रहे हैं।’ आगे कहा कि मतदाताओं को सनातन धर्म के प्रति प्रतिबद्ध असली उम्मीदवारों का ही समर्थन करना चाहिए, क्योंकि इस तरह के नजरिए से आखिरकार एक वैकल्पिक राजनीतिक नेतृत्व तैयार होगा।



















