गजब! पुराने सुपरवाइजरों की वापसी कराने व स्‍मारक कर्मियों के बाद 50 प्राइवेट इंजीनियरों को अवैध निर्माण के हिसाब-किताब में लगाएगा LDA

अवैध निर्माण की सील
फाइल फोटो।

आरयू ब्‍यूरो, लखनऊ। अवैध निर्माण की ठेकेदारी व तमाम शिकायतों के बाद भी जानलेवा इमारतों को संरक्षण देने के लिए कुख्‍यात लखनऊ विकास प्राधिकरण ने एक और चौंकाने वाला फैसला लिया है। गंभीर शिकायतों पर दशकों की तैनाती के बाद हटाए गये प्रवर्तन के पुराने सुरपरवाइजरों की बहाली के साथ बड़ी संख्‍या में स्‍मारक समिति के कर्मियों को प्रवर्तन में लगाने के बाद भी मैन पॉवर की कमी का हवाला देते हुए एलडीए प्राइवेट इंजीनियरों को भी अवैध निर्माण के हिसाब-किताब में लगाने जा रहा है।

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एलडीए इसके लिए आउटसोर्सिंग के माध्यम से 50 जूनियर इंजीनियरों की भर्ती करेगा। यह जेई प्रवर्तन के सातों जोन में तैनात किये जायेंगे। प्राधिकरण के इस फैसले के सामने आते ही कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं। कहा जा रहा कि जब प्राधिकरण सेवा के कई घाघ अफसर-इंजीनियर व कर्मी अवैध निर्माण को संरक्षण देने से नहीं डरते तो करोड़ों की वसूली के चर्चित अवैध निर्माण की ठेकेदारी में उतरने से प्राइवेट इंजीनियरों को किस तरह रोका जा सकेगा।

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वहीं दूसरी ओर आज एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने अधिकारियों के साथ बैठक कर इंजीनियरों की भर्ती का प्रस्ताव भी तैयार करने के निर्देश दिये हैं। अपने फैसले के पक्ष में प्रथमेश कुमार ने तर्क देते हुए मीडिया से कहा है कि लखनऊ में तेजी से हो रहे विकास कार्यों से शहर और आबादी का दायरा बढ़ रहा। ऐसे में निर्माण कार्यों की निगरानी और अवैध निर्माणों पर प्रभावी नियंत्रण बनाये रखने के लिए प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है। इसके लिए समस्त प्रवर्तन जोन में पर्याप्त तकनीकी मानव संसाधन उपलब्ध कराना आवश्यक है।

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वीसी ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए अतिरिक्त जूनियर इंजीनियरों की तैनाती की जाएगी। इससे प्रत्येक प्रवर्तन जोन में निरीक्षण, निगरानी और कार्रवाई की गति बढ़ेगी। मैन पावर बढ़ने से अवैध निर्माण को समय रहते रोका जा सकेगा।

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समय से होगी अवैध निर्माणों की पहचान!

बैठक में उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने कहा कि अतिरिक्त जूनियर इंजीनियरों की तैनाती से सातों प्रवर्तन जोनों की कार्यक्षमता में सुधार होगा। इससे अवैध निर्माणों की समय पर पहचान, नियमित निरीक्षण, शिकायतों के त्वरित निस्तारण तथा सीलिंग एवं ध्वस्तीकरण जैसी प्रवर्तन कार्रवाइयों को और अधिक प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकेगा।

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