आरयू ब्यूरो, लखनऊ। अलीगंज में 15 बेगुनाहों की जान लेने वाले अवैध निर्माण के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण ने सालों पहले रिटायर हो चुके दर्जनभर छोटे-बड़े इंजीनियरों को दोषी माना है। इसके अलावा रिटायर के बाद मृत हो चुके एलडीए के पूर्व चीफ इंजीनियर ए.के. सिंह को भी इसका दोषी बताते हुए शासन से कार्रवाई करने की रिपोर्ट भेजी है।
साथ ही एई अनिल कुमार व जेई प्रमोद पांडेय पर भी आज कार्रवाई करने के लिए एलडीए ने शासन को रिपोर्ट दी है, हालांकि अनिल कुमार व प्रमोद पांडेय को कल ही निलंबित किया जा चुका है। सीएम योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बाद जागे एलडीए ने यह चौंकाने वाला कारनामा करते हुए लोगों को हैरत में डाल दिया है। हालांकि शासन में बैठे सीनियर व अनुभवी आइएएस अफसरों को यह रिपोर्ट कितनी हजम होती है, यह देखने वाली बात होगी।
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कल हुए 15 छात्रों की जिंदगी लीलने वाले अग्निकांड के समय तैनात जोनल अधिकारी व इंजीनियरों को इस मामले में निर्दोष मानते हुए एलडीए ने करीब एक दशक से कॉमर्शियल तरीके से संचालित हो रही अवैध बिल्डिंग के लिए कुल 19 अभियंताओं का नाम आज शासन के सामने रखा है। इनमें अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण के आदेश को देने और निरस्त करने वाले तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव के अलावा पूर्व में तैनात रहे पांच जोनल अधिकारी (तब अधिशासी अभियंता), छह सहायक अभियंता व सात जेई शामिल हैं।
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एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने अपनी रिपोर्ट में तत्कालीन विहित प्राधिकारी (अधिशासी अभियंता) दुर्गेश श्रीवास्तव के अलावा जोनल अधिकारी के रूप में बीते दशक के दौरान तैनात रहे तत्कालीन अधिशासी अभियंता अवनीन्द्र सिंह, बी.पी. मौर्या, पी.सी. पांडेय, आनंद मिश्रा व एके सिंह के खिलाफ रिपोर्ट भेजी गयी है।
इसी तरह जोन चार में तैनात रहे सहायक अभियंता सुनील कुमार, गिरीश चंद्र शर्मा, अमर कुमार मिश्रा, आर.एस. सिंह, अनिल कुमार (निलंबित) व बहुचर्चित संजय शुक्ला के अलावा अवर अभियंता जय प्रकाश नारायण, रवींद्र कुमार श्रीवास्तव, ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव, प्रमोद पाण्डेय (निलंबित), अम्बरीश कुमार शर्मा, शिवानंद शुक्ला व हेमंत कुमार (अन्य मामले में निलंबित) के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गयी है।
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जानकारी के अनुसार इन अभियंताओं में दुर्गेश श्रीवास्तव, अवनींद्र सिंह, बी.पी. मौर्या, पी.सी. पांडेय, सुनील कुमार, गिरीश चंद्र शर्मा, अमर कुमार मिश्रा, आर.एस. सिंह, जय प्रकाश नारायण, ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव व अम्बरीश कुमार शर्मा सालों पहले ही विभिन्न प्राधिकरणों से रिटायर हो चुके हैं, जबकि गैर जनपद तैनात आनंद मिश्र जल्द ही अवकाश प्राप्त होने वाले हैं। इसके अलावा दो साल पहले चीफ इंजीनियर के पद से एलडीए से रिटायर हुए तत्कालीन अधिशासी अभियंता ए.के सिंह की करीब छह महीना पहले मौत भी हो चुकी है।
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सबसे बड़ा दोषी दुर्गेश श्रीवास्तव!
एलडीए की जांच में तत्कालीन विहित प्राधिकारी दुर्गेश श्रीवास्तव की भूमिका को सबसे गंभीर पाया गया है। रिकॉर्ड के अनुसार विहित प्राधिकारी ने साल 2016 में संबंधित भवन के विरुद्ध ध्वस्तीकरण आदेश पारित किया, लेकिन बाद में निर्माणकर्ता के प्रार्थना पत्र पर अपने ही आदेश को समाप्त कर दिया। जांच में यह प्रश्न भी उठाया गया है कि यदि ध्वस्तीकरण आदेश समाप्त किया गया था तो उसके बाद भवन की वास्तविक स्थिति, उपयोग एवं मानचित्र अनुपालन की पुनः जांच क्यों नहीं कराई गई।




















