आरयू ब्यूरो, लखनऊ। बड़े पैमाने पर टेंडर पूलिंग और नगर निगम के क्षेत्रों में काम होने के बाद भी फर्जी टेंडर करने के लिये चर्चा में रहने वाला लखनऊ विकास प्राधिकरण नया पैंतरा अपनाने जा रहा। प्राइवेट कंपनी से अपने टेंडरों की जांच कराने के बाद अब एलडीए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से टेंडर की जांच करेगा।
प्राधिकरण का दावा है कि ऐसा करने से न सिर्फ ठेकेदारों की तरफ से फेक दस्तावेजों के आधार पर टेंडर में भाग लेने वाला फर्जीवाड़ा बंद हो जायेगा, बल्कि टेंडर की तकनीकी और वित्तीय जांच पहले से कहीं अधिक तेज और सटीक होगी। हालांकि प्राधिकरण का यह दावा सही है या फिर कृत्रिम बुद्धिमत्ता की आड़ में कोई नया खेल शुरू होने वाला है इसका पता एआई से टेंडरों की जांच शुरू होने के बाद ही पूरी तरह साफ हो सकेगा।
बहुचर्चित इंजीनियरों पर क्या नहीं लगायेगा लगाम?
वहीं ठेकेदारों के फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने की बात करने वाले एलडीए की ओर से अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि फर्जी इस्टीमेट बनाने और टेंडर मैनेज करने वाले एलडीए के बहुचर्चित इंजीनियरों को वह किस तरह से रोक सकेगा। साथ ही अपने क्षेत्र के कामों का इस्टीमेट बनाने के साथ हास्यापद ढ़ग से खुद ही उसे पास करने वाले अंडर ट्रांसफर इंजीनियर को संरक्षण देने के चलते भी एलडीए के बड़े अफसर-इंजीनियरों पर सवाल उठ रहें हैं।
वीसी ने दिया सिस्टम तैयार करने का निर्देश
एआई चेकिंग सिस्टम लागू करने के लिये एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने आज अधिकारियों के साथ बैठक कर एआई बिड इवैल्यूएशन सिस्टम तैयार करने का निर्देश दिया है।
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एक दिन में महीनेभर वाला काम
बैठक के बाद प्रथमेश कुमार ने मीडिया से कहा है कि सभी प्रकार के टेंडरों में अलग-अलग संस्थाएं प्रतिभाग करती हैं। प्रत्येक टेंडर में औसतन 150 से 200 पन्नों के दस्तावेज होते हैं। इनमें पात्रता, अनुभव, वित्तीय विवरण, तकनीकी योग्यता और अन्य प्रमाण पत्र शामिल रहते हैं। वर्तमान व्यवस्था के तहत टेंडर दस्तावेजों की मैन्युअल जांच की जाती है, जिसमें 15 से 30 दिन का समय लगता है। वीसी ने आगे कहा कि एआई एप से सत्यापन की व्यवस्था लागू होने से टेंडर दस्तावेजों के मूल्यांकन की प्रक्रिया महज एक दिन में पूरी हो जाएगी। इससे परियोजनाओं के आवंटन में तेजी आएगी और समय की काफी बचत होगी।
बढ़ेगा टेंडर प्रक्रिया पर भरोसा!
एलडीए उपाध्यक्ष ने आज यह भी बताया कि टेंडर के नियम एवं शर्तों के अनुरूप फर्म/कंपनियां अपने द्वारा पूर्व में किये गये कार्यों से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करती हैं। एआई मॉडल इन दस्तावेजों का खुद ही विश्लेषण करेगा और अगर किसी संस्था ने फर्जी प्रमाणपत्र, गलत जानकारी या नियमों के विपरीत दस्तावेज लगाए होंगे तो उन्हें तुरंत चिन्हित कर लेगा। इससे अपात्र फर्मों की पहचान आसान होगी और टेंडर प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
प्राधिकरण के करोड़ों के नुकसान को रोकना असली चुनौती
प्रथमेश कुमार ने व्यवस्था का एक और पॉजिटिव प्वाइंट बताते हुए कहा है कि सिस्टम के लागू होने से सभी ठेकेदारों को समान अवसर मिल सकेगा। वीसी ने यह बात ऐसे समय कही है जब एलडीए के लाखों से लेकर करोड़ों रूपये तक के अधिकतर टेंडर में पहले की तरह आठ से 12 की जगह अब तीन से पांच ठेकेदार ही हिस्सा ले रहें हैं। ठेकेदारों के बीच कम्पटीशन नहीं होने के चलते एलडीए को हर महीने करोड़ों रूपये की आर्थिक क्षति हो रही, इस नुकसान को रोकना भी उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार, सचिव विवेक श्रीवास्तव व चीफ इंजीनियर मानवेंद्र सिंह के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
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सभी ठेकेदारों को मिलेगा समान मौका
प्रथमेश कुमार ने आज यह भी कहा है कि एआई तकनीक लागू होने से टेंडर की शर्तों में मनमानी, नियमों की अनदेखी या दस्तावेजों में गड़बड़ी की संभावनाओं पर लगाम लगेगी। एप तय मानकों के आधार पर प्रत्येक बिड का मूल्यांकन करेगा, जिससे सभी प्रतिभागियों को समान अवसर मिलेगा। इस पहल से न केवल टेंडर प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी, बल्कि विकास कार्यों में भी तेजी आएगी। इससे ई-गवर्नेंस व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने में भी सफलता मिलेगी।




















