आरयू वेब टीम। देश की पहली लिक्विफाइड नेचुरल गैस से चलने वाली ट्रेन को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को गुजरात की राजधानी अहमदाबाद के साबरमती रेलवे स्टेशन से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। साथ ही शाह ने साबरमती डिवीजन में भारतीय रेलवे की कई अन्य परियोजनाओं का भी शुभारंभ किया। कार्यक्रम को संबोधित कर गृह मंत्री ने डीजल पर निर्भरता कम करने विद्युतीकरण का विस्तार करने में रेलवे की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रेलवे द्वारा डीजल की खपत 293 करोड़ लीटर से घटकर 108 करोड़ लीटर हो गई है।
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शाह ने कहा ‘2015-16 में रेलवे ने 293 करोड़ लीटर डीजल की खपत की थी। ये आंकड़ा अब 2024-25 में घटकर 108 करोड़ लीटर हो गया है और 2030 तक हम इसे शून्य तक ले आएंगे, जिससे भारतीय मुद्रा की बचत होगी। ये एक बहुत बड़ी उपलब्धि है जिस पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता।’ ‘2010-11 में विद्युतीकरण केवल 75 किलोमीटर तक सीमित था, जबकि 2023-24 में हमने एक ही वर्ष में 7,188 किलोमीटर का विद्युतीकरण कर दिया।
केवल स्वीडन को ही सौ प्रतिशत विद्युतीकरण हासिल
आंकड़ो का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि रेलवे नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत पहले से ही विद्युतीकृत है। हम शेष 0.3 प्रतिशत को भी पूरा कर लेंगे। वैश्विक स्तर पर केवल स्वीडन ने ही सौ प्रतिशत विद्युतीकरण हासिल किया है, लेकिन स्वीडन के रेल नेटवर्क और हमारे रेल नेटवर्क के पैमाने में दस गुना अंतर है।’ इस अवसर पर अमित शाह ने कहा कि ये परियोजनाएं पर्यावरण संबंधी चिंताओं, यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखती हैं। उन्होंने कहा ‘आज साबरमती डिवीजन में भारतीय रेलवे की विभिन्न परियोजनाओं का शुभारंभ हो रहा है।
…1,472 करोड़ रुपये का निवेश शामिल
केंद्रीय गृह मंत्री ने आगे कहा कि स्टेशन और इसकी सुविधाओं में 1,472 करोड़ रुपये के निवेश से पूर्ण परिवर्तन किया गया है। ‘यात्री सुविधा, सुरक्षा और कनेक्टिविटी के मामले में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है। आज जिन परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया व जिन परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई, उनमें 1,472 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है, जो इस क्षेत्र के यात्रियों के लिए बेहद फायदेमंद साबित होंगी।’
ये है एलएनजी ट्रेन की खासियत
इस ट्रेन में एलएनजी डीजल दोनों ईंधनों का उपयोग किया गया है। साबरमती इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो की दो 1,400 हॉर्सपावर वाली ड्राइविंग पावर कार को एलएनजी तकनीक में बदला गया है। दोनों पावर कारों पर पहले ही 2,000 किलोमीटर से ज्यादा के फील्ड ट्रायल पूरे हो चुके हैं। इस तकनीक से डीजल की खपत में लगभग 40 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। बताया जा रहा है कि प्रत्येक पावर कार में करीब 2,200 लीटर क्षमता की एलएनजी टंकी लगी है। आठ कोच वाली यह नॉन-एसी चेयर कार ट्रेन लगभग 25 लाख रुपये तक ईंधन खर्च बच सकता है।
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