आरयू ब्यूरो, लखनऊ। अवैध निर्माण पर कार्रवाई करने की जगह उसको संरक्षण देने और भ्रष्टाचार का सिंडिकेट लखनऊ विकास प्राधिकरण में कितने बड़े पैमाने पर चल रहा इसकी बानगी खुलकर सड़क पर आ गयी है। आइजी विजिलेंस मंजिल सैनी की टीम ने आज एलडीए के सबसे छोटे इंजीनियर (अवर अभियंता) को साढ़े सात लाख रूपये की रिश्वत लेते हुए धर दबोचा है। गोमतीनगर स्थित एलडीए कार्यालय के बाहर हुई कार्रवाई के दौरान सर्तकता अधिष्ठान की टीम ने प्राधिकरण के एक कर्मी व बिचौलिये को भी गिरफ्तार किया है। इनके पास से साढ़े सात लाख रुपये बरामद हुए हैं।
सामने आया है कि एक कार में रिश्वत लेते पकड़ा गया एलडीए प्रवर्तन जोन पांच का जेई दिनेश कुमार वर्मा व पम्प ऑपरेटर (सुपरवाइजर) चंद्रप्रकाश बाहरी व्यक्ति श्रवण कुमार के माध्यम से अवैध निर्माण की आइजीआरएस के जरिये प्राधिकरण में खुद ही शिकायत कराते थे, इसके बाद निर्माणकर्ता को धमकाकर लाखों की वसूली होती थीं।
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विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार इंदिरानगर इलाके में कॉमर्शियल निर्माण कराने वाले एक व्यक्ति ने उनसे शिकायत की थी कि एलडीए जेई दिनेश कुमार ने मौके पर आकर उनका निर्माण बंद कराया था। जिसके बाद दिनेश ने उनसे कहा कि आपके निर्माण की श्रवण कुमार ने आईजीआरएस के माध्यम से शिकायत की है, श्रवण कुमार से मिलकर अपना निपटारा कर लो। फिर श्रवण कुमार ने शिकायतकर्ता को राम मनोहर लोहिया अस्पताल के गेट पर बुलाया और कहा कि मेरी अवर अभियंता साहब से बात हो गई है। यदि 15 लाख रुपये दोगे तो आपके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होगी। श्रवण की बात सुन पीडि़त गोमतीनगर एलडीए ऑफिस पहुंचा तो जेई दिनेश कुमार और सुपरवाइजर ने भी उससे 15 लाख की डिमांड कर डाली।
अगले हफ्ते भी लेना था साढ़े सात लाख
आइजी सतर्कता अधिष्ठान मंजिल सैनी ने बताया कि एलडीए की कार्रवाई से घबड़ाए निर्माणकर्ता ने दो-तीन लाख देने की बात भी कही, लेकिन जेई व सुपरवाइजर नहीं माना। बाद में तय हुआ कि साढ़े सात लाख आज दे दो और साढ़े सात लाख अगले हफ्ते पहुंचा देना। यही साढ़े सात लाख रुपये लेने के दौरान जेई, सुपरवाइजर व शिकायत करने वाले प्राइवेट व्यक्ति को एलडीए ऑफिस के पास से विजलेंस की टीम ने घेराबंदी कर गिरफ्तार किया है। तीनों के खिलाफ विजलेंस थाने में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
LDA में अलग तरह की मॉडस ऑपरेंडी, शिकायत करने से डरें लोग
आइजी ने बताया कि इस मामले में एलडीए के अन्य अफसर की भी शिकायत मिली है, जांच में जो भी इसमें दोषी मिलेगा उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जायेगी। मंजिल सैनी ने यह भी बताया कि शुरूआती जांच में सामने आया है कि एलडीए में एक अलग तरह की मॉडस ऑपरेंडी चल रही, यहां प्राधिकरण के ही इंजीनियर प्राइवेट लोगों को रखकर इस तरह के काम करा रहें हैं। जनरली लोग इनकी शिकायत करने से भी डरते हैं, इस मामले में भी शिकायतकर्ता डर रहे थे, लेकिन उन्हें समझाने और विश्वास में लेने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की जा सकी है।
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वहीं मंजिल सैनी ने आज रिश्वत विरोधी हेल्पलाइन नंबर 9454401866 जारी किया है। आइजी ने आम जनता से अपील की है कि अगर कोई भी अधिकारी-कर्मी या अन्य सरकारी काम करने के बदले रिश्वत मांगता है तो उक्त नंबर पर शिकायत करें, भ्रष्टाचार के खिलाफ जल्द से जल्द कार्रवाई की जायेगी।
मैनपॉवर और दहशत से बढ़ती है वसूली
अवैध निर्माण से वसूली के मामले में विजलेंस ने भले ही लंबे अर्से बाद एलडीए के सिंडिकेट पर हाथ डाला है, लेकिन करोड़ों रुपये की वसूली वाला यह खेल प्राधिकरण में शायद ही किसी से छिपा हो। मैनपॉवर और कार्रवाई की दहशत के दम पर फलने-फूलने वाले वसूली के इस धंधे को समझते हुए एलडीए के पूर्व वीसी इंद्रमणि त्रिपाठी ने प्राधिकरण के सातों जोन से सभी सुपरवाइजर को हटा दिया था। तत्कालीन वीसी के इस कदम के बाद वसूली के मामलों में कमी भी आयी थीं।
इंद्रमणि त्रिपाठी के जाने के बाद हो गया खेल
करीब दो साल पहले इंद्रमणि त्रिपाठी का तबादला एलडीए से होने के बाद खेल फिर शुरू हो गया। दशकों प्रवर्तन में तैनात रह चुके वसूली के लिये चर्चित दर्जनों सुपरवाइजरों ने अधिष्ठान से जुड़े अधिाकरियों से मिलीभगत कर फिर से अपनी तैनाती पंसदीदा जोन में करा ली थीं। इतना ही नहीं बड़ी संख्या में स्मारक समिति के कर्मी और इंजीनियर भी वसूली के लिये बदनाम प्रर्वतन अनुभाग में जगह बनाने में कामयाब हो गये हैं। कहा यह भी जा रहा कि आज गिरफ्तारी के समय भी जेई दिनेश कुमार के साथ हमेशा मौजूद रहने वाला स्मारक का एक कर्मी व इंजीनियर भी मौके पर ही थे, हालांकि वह विजिलेंस के चंगुल में फंसने से पहले ही भाग निकलने में कामयाब रहें।
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जेई की नौकरी शुरू तो ऑपरेटर की होने वाली थीं खत्म
लाखों की वसूली करते पकड़े गये विद्युत यांत्रिक के जेई दिनेश वर्मा की नौकरी अभी ज्यादा पुरानी नहीं है। दिनेश ने करीब 23 महीने पहले ही अपनी नौकरी की शुरूआत करते हुए एलडीए में ज्वाइनिंग दी थीं। जबकि पंप ऑपरेटर चंद्रप्रकाश की अधिकतर नौकरी जोन दो के अवैध निर्माणों के आसपास ही बीती है, अगामी नवंबर में ही रिटायर होने वाले चंद्र प्रकाश को अलीगंज अग्निकांड के बाद खुद एलडीए वीसी प्रथमेश कुमार ने पिछले महीने जोन दो से हटाते हुए जोन पांच में तैनात किया था। चंद्रप्रकाश की जोन पांच के बीबीडी, चिनहट, इंदिरानगर और गाजीपुर थाना क्षेत्र में होने वाले अवैध निर्माण पर निगांह थीं।
कर्मी हुआ निलंबित, इंजीनियर…
वहीं एलडीए की वसूली का मामला मीडिया की सुर्खी बनने के बाद प्राधिकरण ने भी अपने कर्मी व इंजीनियर पर सख्ती की है। वीसी प्रथमेश कुमार ने साढ़े सात लाख रिश्वत लेने वाले पंप ऑपरेटर चन्द्र प्रकाश को निलंबित कर दिया है। वहीं जेई दिनेश कुमार वर्मा को निलंबित करने के लिये शासन को लेटर भेजा है।
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प्रवर्तन में बाहरियों की नो इंट्री
कार्रवाई के साथ ही उपाध्यक्ष ने प्रवर्तन अनुभाग में तैनात सभी अधिकारियों, अभियंताओं व कर्मियों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। जिसके तहत आईजीआरएस समेत अन्य माध्यमों से होने वाली अवैध निर्माण की शिकायतों पर सघन परीक्षण के बाद ही कार्रवाई करने के निर्देश दिये हैं। इसके अलावा वसूली में श्रवण कुमार की भूमिका को देखते हुए प्रवर्तन अनुभाग कार्यालय में किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगाने के भी निर्देश दिया है।
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बाहरी पेशेवरों पर मुकदमा, अपनों का क्या?
वहीं घूसकांड के चलते एलडीए की राष्ट्रीय स्तर पर बदनामी होने के मामले को प्रथमेश कुमार ने गंभीरता से लिया है। घूसकांड के बाद उपाध्यक्ष ने शनिवार रात एक बयान जारी करते हुए मीडिया से कहा है कि कई मामलों में देखा गया है कि आपसी विवाद, रंजिश व ब्लैकमेल करने की नियत से कुछ लोगों द्वारा लगातार आईजीआरएस, व्हाट्सएप व अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से निर्माण कार्यों की शिकायत की जा रही जिससे कि आम नागरिकों को मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना का शिकार होना पड़ता है। इस संबंध में पूर्व में भी ऐसे शिकायतकर्ताओं की सूची तैयार करवायी गयी थी। अब पुनः पेशेवर शिकायतकर्ताओं को चिन्हित कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जायेगा। साथ ही शासन के माध्यम से इनकी सूची जांच के लिए सक्षम विभाग को भेजी जाएगी। हालांकि दिनेश वर्मा जैसे प्रवर्तन में तैनात कई अन्य चर्चित जूनियर इंजीनियरों से एलडीए भविष्य में कैसे निपटेगा इसके बारे में फिलहाल वीसी ने मीडिया को नहीं बताया है।




















