आरयू ब्यूरो, लखनऊ। प्रवर्तन से जुड़े अधिकारी-इंजीनियर व कर्मियों की सैलरी समेत अन्य सुविधाओं पर महीने में एलडीए के करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी सूबे की राजधानी तेजी से अवैध निर्माण का हब बनती जा रही। अवैध निर्माण रोकने में फेल चर्चित जोनल अधिकारियों-अभियंताओें के कारस्तानियों की लगातार चर्चों के बीच आज एलडीए के एक फोर्थ क्लास कर्मी को निलंबित कर दिया गया है।
निलंबन करने के पीछे के तर्कों की मानें तो जोन दो के इस सुपरवाइजर ने न सिर्फ एक अवैध निर्माणकर्ता से अकेले ही मोटी रकम वसूली, बल्कि बाद में उसने अवैध निर्माण को भी प्रवर्तन से जुड़े अपने अधिकारी-अभियंताओं से सील करा दिया। हालांकि बताते चलें नोटिस काटने से लेकर सीलिंग आदेश देने व उसका पालन कराने में सुपरवाइजर की कागजों में भूमिका न के बराबर होती है।
‘अर्निंग हैंड’ में मची हलचल
वहीं लंबे समय बाद भ्रष्टाचार के मामले में सुपरवाइजर निलंबित होने से अवैध निर्माण की ठेकेदारी में ड़ंके की चोट पर डूबे प्राधिकरण के अभियंताओं व अधिकारियों के अलावा इनके लिए ‘अर्निंग हैंड’ की तरह इस्तेमाल होने वाले चतुर्थ श्रेणी कर्मियों में भी हलचल मच गयी है।
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पहले काम पर लगाया ब्रेक, फिर…
निलंबन के बाद आज एलडीए की ओर से प्रेस नोट जारी कर कहा गया है कि आलमबाग निवासी प्रेम शंकर शर्मा द्वारा कृष्णानगर मेट्रो स्टेशन के पास लगभग 200 वर्गमीटर में निर्माण कार्य कराया जा रहा था। एलडीए की मानें तो अवैध निर्माण कराने वाले प्रेम शंकर ने ही प्रार्थना पत्र देते हुए अधिकारियों से कहा था कि प्रवर्तन जोन तीन में तैनात सुपरवाइजर अली नकवी रिजवी ने साल 2025 में स्थल पर पहुंचकर निर्माण कार्य रूकवा दिया। इसके बाद निर्माण फिर से शुरू कराने के एवज में रूपयों की मांग की। रूपये देने के बाद भी सुपरवाइजर ने निर्माणाधीन भवन की नोटिस करा बीती 20 मई को उनका निर्माण सील करवा दिया। हालांकि यहां एलडीए ने यह नहीं बताया है कि निलंबित हुए सुपरवाइजर अली नकवी ने शिकायकर्ता से कितने रुपयों की वसूली की थीं और वसूली की रकम एलडीए के बहुचर्चित 80-20 प्रतिशत वाले फॉमूले के आधार पर अधिकारी व इंजीनियर के बीच बंटी थी या नहीं।
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प्राधिकरण की मानें तो एलडीए को अधिकारियों की कार्यशैली व क्षमता को कलंकित करने वाले इस मामले को विभाग के मुखिया प्रथमेश कुमार ने गंभीरता से लेते हुए तुरंत जांच करवायी थीं। प्रारभिंक जांच में सामने आया कि सुपरवाइजर अली नकवी ने अवैध निर्माण रोकने का समुचित प्रयास नहीं किया। जिससे सुपरवाइजर और निर्माणकर्ता के बीच साठगांठ की संभावना प्रतीत होती है। लापरवाही उजागर होने पर आरोपी सुपरवाइजर अली नकवी रिजवी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। मामले की जांच के लिए उप सचिव माधवेश कुमार को जांच अधिकारी नामित किया गया है। इसके अलावा प्रवर्तन जोन तीन के सहायक अभियंता जेएम सिंह व तत्कालीन अवर अभियंता ओमपाल को कारण बताओ नोटिस दिया गया है।
कार्रवाई नहीं होने से शक के घेरे में बड़े भी
बताते चलें कि अवैध निर्माण की ठेकेदारी से लेकर टेंडर पूलिंग कराने जैसे संगीन मामलों में भी अभियंताओं पर पहले जैसी कार्रवाई प्राधिकरण में अब नहीं होती। यही वजह है कि इस तरह के मामले लगातार सिर्फ मीडिया और सोशल मीडिया की सुर्खियों तक ही सीमित रह जाते है।
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वहीं कुछ मामलों में सिर्फ चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर जरूर कोरम पूरा किया जाता है, हालांकि बाद में गुपचुप ढ़ग से उन्हें भी बहाल कर दिया जाता है। पिछले दिनों एलडीए कार्यालय में ही बिना टेंडर के साढ़े चार करोड़ रुपये के रेनोवेशन के काम कराने जैसे संगीन मामले के खुलासे के बाद दोषी इंजीनियर को बचाने व अवैध निर्माण की ठेकेदारी में वसूली करने वाले निलंबित सुपरवाइजर को बहाल कर प्रवर्तन जोन सात में ही तैनाती देने जैसे फैसले बताते है कि एलडीए की गाड़ी एक बार फिर से करप्शन के ट्रैक पर फुल स्पीड में भ्रष्ट अफसर-इंजीनियर दौड़ा रहे हैं।


















