आरयू वेब टीम। पश्चिम बंगाल की सत्ता से बाहर होते ही ममता बनर्जी की पार्टी ताश के पत्ते की तरह बिखरती जा रही है। इस बीच बुधवार को बंगाल में ममता बनर्जी को एक और बड़ा झटका लगा है। कांग्रेस से तृणमूल कांग्रेस में आईं सुष्मिता देव ने भी राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है। साथ ही टीएमसी भी छोड़ दी है।
ये भी जानकारी सामने आई है कि सुष्मिता देव ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात भी की है। जिसके बाद ये भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि वो भाजपा में शामिल हो सकती हैं। इतना ही नहीं भाजपा उन्हें असम से राज्यसभा भी भेज सकती है। दरअसल पहले टीएमसी के 58 विधायक बागी हो गए और उन्होंने ममता बनर्जी को चुनौती देते हुए विधानसभा में अपना नेता प्रतिपक्ष रितब्रता बनर्जी को बनाया। उसके बाद टीएमसी के करीब 20 लोकसभा सांसदों का एक गुट अलग हो गया। उन सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर मीटिंग की, जिसमें बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद थे।
वहीं बात करें सुष्मिता देव की तो वे असम के सिलचर की रहने वाली हैं। वह 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर सिलचर से सांसद चुनी गई थीं। इसके अलावा कांग्रेस ने उन्हें महिला कांग्रेस का अध्यक्ष भी बनाया था। सुष्मिता पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता संतोष मोहन देव की बेटी हैं। साल 2021 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी और ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी में शामिल हो गईं, जिसके बाद ममता बनर्जी ने एक महीने बाद ही उन्हें राज्यसभा भेज दिया था। वह संसद की कई प्रमुख समितियों में भी शामिल थीं और महिलाओं के मुद्दों पर मुखर होकर अपनी बात रखती थीं।
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बता दें कि शुखेंदु शेखर रॉय ने पहले राज्यसभा से इस्तीफा दिया। उन्होंने टीएमसी छोड़ते हुए आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के बारे में खुलकर बोलने के बाद उन्हें पार्टी में अलग-थलग कर दिया गया था। रॉय ने बंगाल में टीएमसी की हार पर कहा कि आरजी कर के मुद्दे को लेकर तो नाराज की थी ही, लेकिन उसके अलावा भी कई सारे मुद्दे थे जिसको लेकर के जनता के दिल में गुस्सा था और वह जब आरजी कर हुआ उसके बाद सामने आया। गौरतलब है कि टीएमसी के राज्यसभा में 13 सांसद थे, जिनमें से दो का इस्तीफा हो चुका है, अब सिर्फ 11 सांसद बचे हैं।


















