आरयू ब्यूरो, लखनऊ। 15 बेगुनाहों की जान लेने वाले अलीगंज अग्निकांड को लेकर विपक्ष लगातार योगी सरकार को घेरे है। आज इसी क्रम में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने ध्वस्तीकरण आदेश के बाद भी जानलेवा बिल्डिंग को बचाने वाले लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारी और इंजीनियरों पर सवाल उठाते हुए योगी सरकार से पूछा है कि ध्वस्तीकरण आदेश के दस साल बाद भी यह बिल्डिंग अब तक कैसे खड़ी थीं। आप नेता ने योगी सरकार से कहा है कि सिर्फ सस्पेंड करने से काम नहीं चलेगा इस अग्निकांड के दोषियों को जेल भेजा जाए।
गोमतीनगर स्थित आप कार्यालय पर आयोजित प्रेसवार्ता में संजय सिंह ने कहा कि जिस कंप्यूटर सेंटर की बिल्डिंग में आग लगी, उसे ध्वस्त करने का आदेश 2016 में ही हो चुका था। पिछले दस में से साढ़े नौ साल तो सूबे में योगी आदित्यनाथ की सरकार है, फिर यह अवैध और जर्जर बिल्डिंग कैसे खड़ी रही? किसके संरक्षण में इसे चलाया जा रहा था, इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
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वहीं आप सांसद ने फायर डिपार्टमेंट की बदहाली पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जब लोग दमकल विभाग को फोन कर रहे थे, तो समय पर कोई गाड़ी नहीं पहुंची। दिल्ली से लेकर लखनऊ तक हर अग्निकांड के बाद केवल जांच का नाटक होता है।
आप सांसद ने यह मांगें भी की-
1.उत्तर प्रदेश के पूरे फायर डिपार्टमेंट की समीक्षा की जाए, विभाग का बजट बढ़ाया जाए और उन्हें आधुनिक उपकरण, पाइप व गाड़ियाँ उपलब्ध कराई जाएं।
2- दोषी अधिकारियों पर निलंबन (सस्पेंशन) जैसी रस्म अदायगी के बजाय सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए।
3- मृतकों के परिजनों को दिया जा रहा 2-2 लाख और 5-5 लाख रुपये का मुआवजा एक क्रूर मजाक है। अडानी जैसे मित्रों पर दौलत लुटाने वाले प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री पीड़ितों को पर्याप्त सम्मानजनक मुआवजा दें।
4- संजय सिंह ने बताया कि उन्होंने इस हादसे में घायल हुई बेटी लवप्रीत से अस्पताल में मुलाकात की है, जिसने बताया कि आग नीचे से इतनी तेजी से फैली कि संभलने का मौका नहीं मिला। वहीं एक अन्य घायल बच्चा जयंत इस समय आईसीयू में भर्ती है।
राम मंदिर में चंदा चोरी और दान की वस्तुओं का गबन
प्रेसवार्ता के दूसरे हिस्से में संजय सिंह ने राम मंदिर ट्रस्ट और भाजपा नेताओं पर करोड़ों हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने का सीधा आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “प्रभु श्री राम के मंदिर में कोई सामान्य चोरी नहीं हुई है। चंपत राय और ट्रस्ट के लोगों ने यह चोरी सीधे तौर पर ‘ईडी (ED) पार्टी’ यानी भाजपा के लिए की है। जमीनों की खरीद के लिए मोदी जी के प्रतिनिधि रहे ज्ञानेश कुमार के रहते हुए जमीनों के दाम कई गुना बढ़ाकर घोटाले किए गए।”
आप नेता ने आगे कहा कि ज्वैलर्स एसोसिएशन और सिंधी समाज द्वारा भगवान को अर्पित की गई 200 किलो चांदी (कीमत लगभग 7 करोड़), बहुमूल्य हार, और संतोष दुबे द्वारा बताई गईं 1260 सोने-चांदी की शिलाएं व प्रभु की पादुकाएं तक गायब कर दी गईं। उन्होंने तंज कसा कि जिस प्रकार राजा भरत ने प्रभु की पादुकाएं रखकर 14 वर्ष शासन किया था, भाजपा ने उन पवित्र पादुकाओं को ही चोरी कर लिया।
‘न राम के लिए, न काम के लिए’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “15 दिन इंतजार करने और एसआईटी को साक्ष्य सौंपने” के बयान पर पलटवार करते हुए संजय सिंह ने कहा, “मैंने 20 जून को ही एसआईटी के अध्यक्ष विजय विश्व पंत और सदस्य किरण (आईजी लखनऊ रेंज) को पत्र व आधिकारिक ईमेल भेजकर सुल्तान अंसारी और आलोक बंसल से जुड़ी जमीनों के घपले के साक्ष्य सौंपने के लिए समय मांगा था। आज 23 तारीख हो गई, लेकिन चोरों को बचाने में जुटी एसआईटी ने साक्ष्य लेने तक की जहमत नहीं उठाई। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सीधे संजय प्रसाद (जो खुद एक्स-ऑफिसियो मेंबर हैं) को सौंप दी है, जिससे साफ है कि इसमें पूरी तरह लीपा-पोती कर दी गई है। यह एसआईटी न राम के लिए है, न काम के लिए; यह केवल चंदा चोरों को बचाने के लिए है।




















