आरयू ब्यूरो, लखनऊ। यूपीआइ लेनदेन पर संभावित शुल्क को लेकर देशभर में राजनीतिक माहौल गर्म है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार मोदी सरकार पर हमलावर है। इसी बीच बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। बसपा प्रमुख ने इस नई व्यवस्था को आम जनता की दोनों हाथों से होने वाली लूट करार दिया है। मायावती का कहना है कि सरकार ने पहले डिजिटल भुगतान को जमकर बढ़ावा दिया और अब मुनाफाखोरी वाली पूंजीवादी सोच के तहत इस पर टैक्स थोपा जा रहा है।
बसपा मुखिया ने आज अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्टकर कहा कि यूपीआइ डिजिटल लेनदेन को पहले खूब बढ़ावा देने के बाद अब सरकार द्वारा उस लेनदेन पर शुल्क वसूलने की नई व्यवस्था लोगों की नजर में प्रथम दृष्टया मुनाफाखोरी के पूंजीवादी रवैये के तहत जनता से दोनों हाथों से टैक्स वसूली है, जिससे जनता में बेचैनी व आक्रोश स्वाभाविक है। वैसे तो जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने की इस व्यवस्था को ’कर’ मानने को तैयार नहीं है, किन्तु दिनांक 15 अक्तूबर से लागू हाने वाली इस व्यवस्था को चाहे जो भी नाम दिया जाये जेब तो अन्ततः आमजनता की ही कटेगी, उसका ही खर्च बढ़ेगा।
बसपा प्रमुख ने कहा कि देश की बहुसंख्यक जनता अपार गरीबी व जबरदस्त महंगाई आदि की मार से त्रस्त है व उनके बच्चे अशिक्षा, बेरोजगारी व अव्यवस्था आदि से पीड़ित हैं, ऐसे में सरकार की नीति व कार्य योजना लाभ कमाने वाली व्यावसायिक कम व कल्याणकारी ज्यादा हो तो ये उचित होगा। जनता की तंगी, दुख-तकलीफ की अगर सरकार चिन्ता नहीं करेगी तो फिर कौन करेगा?
यह भी पढ़ें- UPI पेमेंट पर चार्ज लगने का रास्ता साफ, लोकसभा में पास हुआ संशोधन विधेयक
इसके अलावा मायावती ने कहा कि यूपी सरकार द्वारा करीब 300 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के कीरब 14,500 स्कूलों को ’स्मार्ट स्कूल’ बनाने की घोषणा अच्छी बात है, लेकिन बच्चों को कथित ’स्मार्ट पढ़ाई’ से पहले उन्हें बुनियादी शिक्षा आदि की जरूरतें अर्थात स्कूली बच्चों के सर पर छत, उनके लिये बेंच, कुर्सी, किताब, शौचालय, मैदान, साफ-सफाई आदि की सही व्यवस्था पूरी की जायें और यह सब प्रति स्कूल करीब दो लाख रुपये में क्या संभव हो पायेगा, इस पर भी सरकार सहानुभूतिपूर्वक जरूर विचार करे।




















