आरयू ब्यूरो, लखनऊ। अगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बसपा में पारिवारिक घमासान मचा हुआ है। बसपा सुप्रीमो मायावती का गुस्सा अपने भतीजे आकाश आनंद के खिलाफ भड़कता ही जा रहा है। पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ के मायावती से माफी मांगने के साथ ही राजनीत से सन्यास लेने की आज घोषणा करने के बाद भी आकाश आनंद को बसपा में पद देने के उलट मायावती ने एक बार फिर उन्हें बसपा से ही बाहर निकाल दिया है। साथ ही अपनी पोस्ट रिपोस्ट करने पर भी नाराजगी जताई है।
अपने फैसले से पहले मायावती ने कल ही आकाश आनंद को इस शर्त पर बसपा में फिर से पद देने की बात सोशल मीडिया के जरिये कही थीं कि उनके श्वसुर अशोक सिद्धार्थ को राजनीत से सन्यास लेना होगा। मायावती की इस शर्त के बाद आज सुबह सात बजे से ही पहले अशोक सिद्धार्थ ने न एक्स पर पोस्ट करते हुए न सिर्फ मायावती से माफी मांगी, बल्कि राजनीत भी छोड़ने का ऐलान कर दिया।
फैसला काफी पहले लेते तो…
अशोक के ऐलाने के बाद मायावती ने एक्स पर संभवत अपनी अब तक का सबसे लंबी दस प्वाइंट वाली पोस्ट लिखते हुए कहा कि आज अशोक सिद्धार्थ द्वारा राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा अति-देर से उठाया गया यह सही कदम है। वैसे लोगों का यही कहना है कि अगर यह फैसला वे काफी पहले ही ले लेते तो बीएसपी, बहुजन समाज व बहुजन मूवमेन्ट तथा उनके दामाद आकाश आनन्द को भी लगातार विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता और ना ही मुझे विधानसभा आमचुनाव एवं खासकर यूपी में पांचवीं बार सरकार बनाने की ज़बरदस्त तैयारियों के बीच, पार्टी व मूवमेन्ट के व्यापक हित के मद्देनज़र इनके बारे में कई बार कड़े फैसले लेने आदि की जरूरत पड़ती।
यह भी पढ़ें- बसपा नेताओं की बैठक में मायावती ने आकाश आनंद को फिर बताया अपरिपक्व, नेशनल कोऑर्डिनेटर पद भी छीना
कांशीराम की तरह ही मैं भी समर्पित
मायावती ने अपना फैसला सुनाने से पहले आगे कहा कि यह भी सर्वविदित है कि बहुजन समाज पार्टी की अम्बेडकरवादी राजनीति की परम्परा, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के पदचिन्हों पर चलने वाली ज़बरदस्त त्याग, तपस्या, संघर्ष व कुर्बानी आदि के साथ-साथ सबसे बढ़कर निजी व पारिवारिक स्वार्थ से दूर रहने की विशिष्ठ पहचान की है, जिसे मान्यवर कांशीराम की तरह ही मैं भी समर्पित हूं और जिससे पार्टी के सभी लोगों को जरूर सबक सीखकर बीएसपी में आगे बढ़ाने के लिये निजी व पारिवारिक स्वार्थ व पद आदि की लालसा से ऊपर उठना चाहिये तभी फिर यहां सदियों से शोषित, पीड़ित, उपेक्षित व तिरस्कृत ’बहुजन समाज’ ’शासक वर्ग’ बन पायेगा और इस क्रम में हमेशा याद रहे कि जितना महान लक्ष्य, उतनी ही बड़ी कुर्बानी की भी जरूरत होती है।
कल फौरन ही राजनीत से सन्यास की घोषणा करते
अपनी पोस्ट के चौथे प्वाइंट में मायावती ने कहा कि कुल मिलाकर अशोक सिद्धार्थ का राजनीति से संन्यास लेने का फैसला ’देर आये दुरुस्त आये’ की कहावत की तरह ही यह अच्छी बात है। किन्तु अशोक सिद्धार्थ को, अपने दामाद आकाश आनन्द के उज्जवल भविष्य के साथ ही बीएसपी व इसके अम्बेडकरवादी बहुजन मूवमेन्ट के व्यापक हित के प्रति थोड़ी भी सही चिन्ता होती, (जो कि उनमें स्वाभाविक तौर पर होनी ही चाहिये), तो वे बिना देरी किये कल फ़ौरन ही राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर देते और जिससे आकाश आनन्द की पार्टी व मूवमेन्ट के प्रति सक्रियता काफी हद तक सुनिश्चित हो सकती थी, किन्तु ऐसा कुछ नहीं होना यह साबित करता है कि अशोक सिद्धार्थ की नीयत में खोट व अभिलाषा कम नहीं हुई है, बल्कि अभी तक भी पूरी तरह से बरकरार है।
पोस्ट रिपोस्ट करना भी उचित नहीं समझा
वहीं मायावती ने अपने भतीजे की नियत पर सवाल उठाते हुए कहा कि आकाश आनन्द ने भी अपने कैरियर से अधिक अपने ससुर अशोक सिद्धार्थ के प्रति इस हद तक लगाव क़ायम है कि उन्होंने बीएसपी प्रमुख के सोशल मीडिया एकाउण्ट एक्स पर तत्सम्बंधी पोस्ट को रिपोस्ट करना भी उचित नहीं समझा, हालांकि यह पोस्ट उनके ही सकारातमक व भलाई के लिये था। जबकि इससे पहले वे उनके पोस्ट को रिपोस्ट कर अपनी वफादारी का सबूत देने का प्रयास करते रहे हैं। इससे भी यही लगता है कि अशोक सिद्धार्थ व आकाश आनन्द दोनों को पार्टी व मूवमेन्ट की सफलता में कम व अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ का ज़्यादा मोह है, जबकि बसपा ने ही इन दोनों को व अन्य अनेक लोगों को फर्श (जमीन) से अर्श (आसमान) की बुलन्दी पर पहुंचाया है और जिसके लिये उन सभी लोगों द्वारा बसपा व उसके नेतृत्व (मायावती) का जितना भी वे लोग अहसान मानें व शुक्रगुज़ार हों वह कम ही होगा ऐसा सभी लोगों का मानना है।
डबल माइंड होकर कैसे करेंगे भला
ऐसे हालात में आकाश आनन्द को पार्टी व मूवमेन्ट के वास्तविक हित तथा इससे जुड़े अपने कैरियर की भी परवाह कम तथा रिश्ते-नातों आदि का मोह ज़्यादा है तो ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आकाश आनन्द डबल माइण्ड होकर फिर बीएसपी व मूवमेन्ट का भला कैसे कर सकते हैं? इसीलिये पार्टी के लोगों को यही बेहतर लगता है कि उन्हें पहले दिनांक 3 सितम्बर 2026 को जिस प्रकार से पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक के अति-महत्वपूर्ण पद की सभी अहम ज़िम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया था, उसी प्रकार अब उन्हें पार्टी में भी आज से पूरी तरह से फ्री (आज़ाद) कर दिया जाये। अतः आकाश आनन्द पार्टी में अब स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं अर्थात ऐेस में अब इनको पार्टी से पूरेतौर से मुक्त कर दिया गया है।
तन, मन व धन से लगे रहें
अपनी घुमावदार पोस्ट को समाप्त करते हुए मायावती ने समर्थकों से कहा कि अन्त में यही कहना है कि बीएसपी के सभी लोगों को, विरोधियों के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि सभी प्रकार के हथकण्डों का डट कर सामना करते हुये ख़ासकर यूपी में फिर से पूर्ण बहमत की अपनी सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय की ज़बरदस्त क़ानून-व्यवस्था व बेहतरीन विकास वाली आयरन हुकूमत बनाने के संघर्ष में, पूरे जी-जान से अर्थात पूरे तन, मन, धन की लगन से लगे रहें, बस यही लक्ष्य सर्वोपरि है।
यह भी पढ़ें- मायावती ने फिर आकाश आनंद के ससुर को किया बसपा से बाहर, कहा अब कतई नहीं होगी BSP में वापसी
अशोक ने पोस्ट कर कहीं ये बातें-
वहीं इससे पहले अशोक सिद्धार्थ ने आज सुबह एक लंबी पोस्ट करते हुए मायावती से कहा कि, परम आदरणीय बहन जी सादर चरण स्पर्श, माननीया बहन जी आपको अवगत कराना है कि, मेरे लिए आपका आदेश दुनिया की किसी भी चीज़ से बढ़ कर है। आपके आदेश के आगे मेरे रिश्ते नाते, परिवार सभी बेहद छोटे हैं। आपके मार्गदर्शन में, मैं बीते पैंतीस वर्षों से बीएसपी और मान्यवार साहेब कांशीराम और बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के मिशन के लिए समर्पित रहा हूं।
आपने आज तक जो भी जिम्मेदारी दी है उसे अपने पूरे सामर्थ्य के साथ निभाने की कोशिश की है। आप मेरी राजनैतिक गुरू हैं, मेरी बड़ी बहन हैं, आपने मुझ जैसे अदने से व्यक्ति को क्या कुछ नहीं दिया, आपकी वजह से ही मैं विधान परिषद और राज्य सभा तक का सदस्य रहा हूँ। आपने मुझे इस लायक समझा कि आपने मुझ जैसे मामूली से कार्यकर्ता को अपने परिवार का सदस्य बनाया। ये आपका ऋण है, जो मैं इस जीवन में चुका भी नहीं सकता।
गौतम बुद्ध व कांशीराम की खायी कसम
पूर्व सांसद ने आगे कहा कि परमपूज्य आदरणीय बहन जी, मेरे आराध्य तथागत भगवान गौतम बुद्ध और मेरे राजनीतिक आदर्श मान्यवर साहेब कांशीराम जी की क़सम खाता हूँ, कि मैंने कभी भी पार्टी के हित के खिलाफ कोई काम नहीं किया और आपके खिलाफ कुछ भी करने का तो मैं सपने में भी सोच नहीं सकता हूं। मेरा और मेरे परिवार का ये पूरा जीवन आपका ऋणी है। आदरणीय बहन जी, आपकी एक-एक नसीहत और आदेश मेरे लिए अंतिम शब्द हैं।
कई महीनों से नहीं हुई आकाश से मुलाकात
आदरणीय बहन जी, माननीय आकाश आनंद को सलाह देना तो दूर बीते कई महीनों से मेरी उनसे मुलाकात भी कुछ एक अवसर पर तब हुई जब उनके कार्यक्रम उन राज्यों में लगे जिनकी जिम्मेदारी आपने मुझे दी हुई थी।
मान० बहन जी हमारी पार्टी के ही कुछ साथी मुझे आपसे मिले सम्मान के कारण मुझ पर ये आरोप लगाते हैं कि मैं पार्टी पर कब्जा करना चाहता हूं, मैं माननीय आकाश आनंद को गुमराह करने की कोशिश कर रहा हूं…इसमें लेशमात्र भी सच्चायी नहीं है।
विरोधी कर रहें साजिश
आदरणीय बहन जी मैं आपसे विनम्र निवेदन के साथ कहा रहा हूं कि ये मेरे राजनैतिक विरोधियों की साजिश है, जो पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं, जिसकी सच्चाई एक न एक दिन आपके सामने जरूर आ जाएगी।
दामाद से पहले आपके भतीजे
आदरणीय बहन जी, मेरी आपसे हाथ जोड़ कर विनती है कि मेरे सन्यास लेने को आप आकाश जी की वापसी से मत जोड़िए, माननीय आकाश आनंद मेरे दामाद से पहले आपके भतीजे हैं, और आदरणीय आनंद भाईसाहब के बेटे हैं। उनके अंदर आपका खून बहता है, उन्होने जीवन के दो दशक आपकी छत्र छाया और देख-रेख में बिताए हैं, मेरे जैसा मामूली सा कार्यकर्ता भला उनको क्या ही गुमराह कर पाएगा। उनका अच्छा-बुरा आप किसी और से ज्यादा बेहतर समझती हैं, उनको वापस जिम्मेदारी देना या ना देना ये आपका फैसला है! इसे मेरे सन्यास लेने से जोड़कर आप मुझ जैसे मामूली कार्यकर्ता को उसकी हैसियत से ज्यादा महत्त्व दे रही हैं।
मायावती को बताया त्याग-दया की मूर्ति
आदरणीय बहन जी, आप खुद में त्याग और दया की मूर्ती हैं, जब बात समाज के हित की आई तो आपने मुख्यमंत्री की कुर्सी और राज्यसभा के सदस्य पद को भी ठोकर मार दी, आदरणीय बहन जी, आप हमारी मार्गदर्शक ही नही हमारी आदर्श भी हैं, और अगर आज आपको लगता है कि मेरे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में रहने से हमारे संतो, गुरुओं और महापुर्षों के बनाए हुए बहुजन मिशन को नुकसान पहुंच रहा है तो मैं अभी इसी वक्त राजनैतिक और सामाजिक जीवन से सन्यास ले रहा हूं।
जान देना भी फक्र की बात
अपनी पोस्ट के अंत में अशोक ने मायावती से कहा कि आदरणीय बहन जी, मेरा ये जीवन आपका ऋणी है, ऐसे में सन्यास तो बहुत छोटी चीज है आपके लिए अगर मुझे कभी अपनी जान भी देनी पड़े तो वो भी मेरे लिए फक्र की बात होगी।
ससम्मान, जय भीम!! जय भारत!!! जय बहुजन समाज!
आपका कार्यकर्ता अशोक सिद्धार्थ, नोट– देरी के लिए क्षमा प्रार्थी!!!




















