आरयू वेब टीम। देश में दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी सीडीएससीओ निगरानी अभियान चला रहा है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि सेंट्रल ड्रग्स लैबोरेटरीज ने मई के लिए अपनी मासिक ड्रग अलर्ट रिपोर्ट में अलग-अलग कंपनियों द्वारा बनाई गई 46 दवाओं के सैंपल को मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाया।
अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा राज्य स्तरीय दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं ने 113 दवाओं के सैंपल को भी एनएसक्यू पाया है। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं ने 46 दवा नमूनों को और विभिन्न राज्यों की औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं ने 113 दवा नमूनों को गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं पाया।
किसी दवा को एनएसक्यू घोषित किए जाने का अर्थ यह है कि परीक्षण के दौरान वह निर्धारित गुणवत्ता मानकों के एक या अधिक मानकों पर खरी नहीं उतरी। हालांकि, सीडीएससीओ ने स्पष्ट किया है कि यह निष्कर्ष केवल जांच किए गए विशेष बैचों तक सीमित है। इससे बाजार में उपलब्ध उसी दवा के अन्य बैचों या उत्पादों की गुणवत्ता पर कोई सामान्य निष्कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। मई 2026 की रिपोर्ट में असम से एक नकली यानी स्प्यूरियस दवा का मामला भी सामने आया है।
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जांच में पाया गया कि एक अनधिकृत निर्माता ने किसी अन्य कंपनी के स्वामित्व वाले ब्रांड नाम का उपयोग कर इस दवा का निर्माण किया था। मामले की जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम तथा नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। सीडीएससीओ ने कहा है कि राज्य औषधि नियामकों के सहयोग से ऐसी दवाओं की नियमित पहचान की जाती है, ताकि उन्हें बाजार से हटाया जा सके और आम जनता को सुरक्षित तथा गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।












