शिक्षक भर्ती आरक्षण घोटाले के खिलाफ दलित-पिछड़े अभ्‍यर्थियों ने घेरा केशव मौर्या का आवास, उठाई सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की मांग

आरक्षण घोटाला
अभ्यर्थियों को रोकती पुलिस। (फोटो-आरयू)

आरयू ब्यूरो, लखनऊ। 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण घोटाले के खिलाफ आज अभ्यर्थियों ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव किया। इस दौरान अभ्यर्थी मामले की सुप्रीम कोर्ट में पैरवी कराने की मांग करते हुए ‘केशव चाचा न्याय करो’ का नारा लगाकर धरने पर बैठ गए। जहां अभ्यर्थियों की पुलिस से जमकर धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद पुलिस ने हाथ-पैर पकड़कर अभ्यर्थियों को गाड़ी में भरकर इको गार्डन भेजा।

दरअसल शिक्षक भर्ती में हुए आरक्षण घोटाले की सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी नही होने से अभ्यर्थी नाराज हैं। भारी संख्या में अभ्यर्थी सोमवार को डिप्टी सीएम केशव मौर्या का आवास घेरने पहुंचे। जिनमें कुछ प्रदर्शनकारी ‘मैं अभागा पिछड़ा, दलित हूं’ और ‘सुप्रीम कोर्ट जातिवादी है’ जैसे स्लोगन लिखे बैनर ओढ़कर पहुंचे थे। पुलिस ने उन्हें रोक लिया और बैनर फाड़ दिए। इससे गुस्साए अभ्यर्थियों की पहले पुलिसवालों से हॉट टॉक हुई, फिर धक्का-मुक्की हो गई। करीब 20 मिनट तक हंगामा चला। जिसके बाद पुलिस अभ्यर्थियों को जबरन गाड़ी में भरकर ईको गार्डन ले गई।

राजभर और मौर्य दावा करते हैं कि…

इस दौरान धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने कहा हम रोज आएंगे और एक-एक विधायक, नेता और मंत्रियों को घेरेंगे। ओम प्रकाश राजभर और स्वामी प्रसाद मौर्य दावा करते हैं कि वे पिछड़ों के सबसे बड़े नेता हैं। अगर पिछड़ी जाति से आने वाले बच्चे ऐसे मार खा रहे हैं, तो ये नेता-मंत्री पुलिस को आगे करके हम लोगों को पिटवा रहे हैं। अगर हमारे नेता मजबूती के साथ खड़े होते, तो अब तक नौकरी मिल जाती।

अधिकारियों ने नहीं मानी डिप्‍टी सीएम की बात

साथ ही कहा कि उन्होंने इससे पहले भी कई बार केशव मौर्या के आवास का घेराव किया था तब उन्होंने त्वरित न्याय किए जाने की बात कही थी और हम अभ्यर्थियों से मुलाकात भी की थी, लेकिन उनकी बात को भी अधिकारियों ने नहीं माना अब यह मामला माननीय सुप्रीम कोर्ट में चला गया। हम पिछड़े दलित गरीब अभ्यर्थी अधिकारियों और सरकार के इस रवैया से काफी हताश और परेशान हैं। जो काम कुछ दिनों में हो सकता था उसे इतना लंबा जानबूझकर टाल दिया गया है। केशव जी का त्वरित न्याय की टिप्पणी, खाने के दांत अलग और दिखाने के दांत अलग साबित हुआ। त्वरित न्याय की कोई सीमा होती है यह नहीं की महीनों मामला लटक रहे।

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मालूम हो कि ओबीसी और दलित अभ्यर्थियों का आरोप है कि इस भर्ती में ओबीसी को 27 प्रतिशत की जगह सिर्फ 3.86 प्रतिशत और एससी को 21 प्रतिशत की जगह 16.2 प्रतिशत आरक्षण मिला था। विवाद बढ़ने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इनके 6800 पदों की चयन सूची को रद्द कर दिया था। पूरी चयन सूची को नियमानुसार, संशोधित करने का आदेश दिया था। फिर यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। जहां अभी सुनवाई चल रही है। ये अभ्यर्थी पुनर्मूल्यांकन और नई मेरिट लिस्ट की मांग करते हुए प्रदर्शन करते रहते हैं।

प्रदर्शन में विक्रम यादव, अमित मौर्या, अनिल, धंनंजय, अनिल कुमार, मो. इरशाद, राहुल मौर्या, उमाकांत मौर्या, शिव मौर्या, अर्चना मौर्या, कल्पना, शशि पटेल आदि अभ्यर्थी शामिल रहे।

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