निजीकरण व कार्रवाईयों से परेशान बिजली कर्मियों ने पावर कॉरपोरेशन के खिलाफ खोला मोर्चा, दी चेतावनी

निजीकरण का विरोध
प्रदर्शन करते बिजली विभाग के कर्मी।

आरयू ब्‍यूरो, लखनऊ। पावर कॉरपोरेशन के निजीकरण और नीतियों के खिलाफ बिजली विभाग के कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। आज विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के आह्वान पर राजधानी लखनऊ समेत प्रदेशभर के जनपदों में बिजली कर्मियों, अवर अभियंताओं, व संविदा कर्मियों ने सभाएं आयोजित कर पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की कार्यवाहियों के खिलाफ विरोध दर्ज कराया गया।

संघर्ष समिति ने बताया कि आज ही अध्यक्ष यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को एक विस्तृत पत्र प्रेषित कर कर्मचारियों के उत्पीड़न से संबंधित गंभीर मुद्दों को उठाया गया है तथा सभी दमनात्मक कार्यवाहियों को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की गई है।

पत्र में जिन मांगों को उठाया गया है उनमें मार्च 2023 की हड़ताल के बाद संविदा कर्मियों, बिजली कर्मचारियों, जूनियर इंजीनियरों व अन्‍य अभियंताओं पर की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्रवाईयों (निष्‍कासन, मुकदमा, निलंबन, वेतन-सेवा लाभ रोकने) को वापस लेने की मांग शामिल है।

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संगठन का कहना था कि भाजपा सरकार के निजीकरण के विरोध में शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे कर्मचारियों पर की जा रही कार्रवाई, जैसे संविदा कर्मियों की छंटनी, फेशियल अटेंडेंस के नाम पर वेतन रोकना, बिना नीति के दूरस्थ स्थानों पर स्थानांतरण, पदाधिकारियों पर विजिलेंस जांच व एफआईआर, तथा विरोध दर्ज करने पर दंडात्मक कार्रवाई को तत्काल बंद करने की मांग भी की गयी है।

इसके अलावा मई 2025 के संशोधित अनुशासनात्मक आदेश, जिनमें बिना जांच सेवा समाप्ति की व्यवस्था की गई है को तत्काल निरस्त किया जाए।

वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग के नाम पर पदों में कटौती, बड़े पैमाने पर स्थानांतरण व संविदा कर्मियों की छंटनी की प्रक्रिया को रोक लगे।

रियायती बिजली की सुविधा समाप्त करने के लिए कर्मियों व पेंशनरों के आवासों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाए जाने की कार्यवाही समाप्‍त हो।

आंदोलन के दौरान बिना कारण किए गए सभी निलंबन वापस लिए जाएं तथा भविष्य में किसी भी प्रकार की दमनात्मक कार्रवाई न की जाए।

एक अप्रैल 2026 से प्रस्तावित बड़े पैमाने पर निलंबन की किसी भी कार्रवाई को तत्काल रोका जाए।

संघर्ष समिति ने बताया कि प्रदेशभर में आयोजित सभाओं में बिजली कर्मियों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे किसी भी प्रकार की उत्पीड़नात्मक कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेंगे और उसके खिलाफ संगठित होकर शांतिपूर्ण और प्रभावी ढंग से संघर्ष करेंगे।

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वक्ताओं ने कहा कि यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बिजली कर्मी लगातार प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में जुटे हैं तथा उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं, इसके बावजूद प्रबंधन द्वारा अपनाई जा रही दमनात्मक नीतियां न केवल कर्मचारियों का मनोबल गिरा रही हैं, बल्कि ऊर्जा निगमों में असंतोष का वातावरण भी पैदा कर रही हैं।

इसके साथ ही आज संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि अगर अगामी 11 अप्रैल  तक उक्त सभी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए कार्यवाही नहीं की गयी तो लखनऊ में केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक कर प्रदेशव्यापी आंदोलन का निर्णय लिया जाएगा।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि अगर एक अप्रैल या अथवा उसके बाद किसी भी कर्मचारी, जूनियर इंजीनियर या अभियंता का उत्पीड़नात्मक निलंबन किया जाता है, तो उसके विरोध में तत्काल सामूहिक सत्याग्रह किया जाएगा।

…लेकिन निजीकरण के उद्देश्‍य से उत्‍पीड़न स्‍वीकार नहीं

संघर्ष समिति ने पुनः दोहराया कि बिजली कर्मी प्रदेश की जनता को बेहतर व निर्बाध विद्युत आपूर्ति देने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं, लेकिन निजीकरण के उद्देश्य से कर्मचारियों का उत्पीड़न किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।