नौकरी वापसी न होने पर एम्बुलेंस टेक्नीशियन का प्रदर्शन, कहा डिप्टी सीएम की भी नहीं सुन रहे अधिकारी

जीवीके ईएमआरआइ
प्रदर्शन करते एंबुलेंस टेक्नीशियन।

आरयू ब्यूरो, लखनऊ। नौकरी से निकाले गए एंबुलेंस टेक्नीशियनों ने बुधवार को आशियाना कालोनी स्थित जीवीके ईएमआरआई कार्यालय के बाहर धरना दिया और जमकर नारेबाजी भी की। प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रदेश के कई जिलों से बड़ी संख्या में पहुंचे टेक्नीशियनों का आरोप है कि डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के कहने के बाद भी कंपनी उन्हें नौकरी पर वापस नहीं रख रही है। इसी के विरोध में कर्मचारियों ने नारेबाजी शुरू कर दी।

टेक्नीशियनों का कहना है कि कंपनी के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, लेकिन कोई मिलने को तैयार नहीं हुआ। वहीं धरने की अगुवाई कर रहे शरद यादव ने दावा किया कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों से करीब तीन से चार हजार टेक्नीशियन लखनऊ पहुंचे हैं। उनका आरोप है कि कंपनी ने बिना कोई ठोस कारण बताए उन्हें नौकरी से निकाल दिया था।

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साथ ही कहा कि कुछ समय पहले डिप्टी डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कंपनी के अधिकारियों से बातचीत कराकर नौकरी पर वापसी का भरोसा दिया था। इसके बावजूद कंपनी के अधिकारी ने उनकी बात नहीं सुनी। जिससे टेक्नीशियनों के पास आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। कर्मचारी अपने घर छोड़कर लखनऊ आ गए हैं और यहीं कैंप कर रहे हैं। जब तक नौकरी वापस नहीं मिलती, तब तक लखनऊ नहीं छोड़ेंगे।

हम सरकार और मंत्री को देते हैं पैसा

इस दौरान एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष शरद यादव ने कंपनी पर आरोप लगाते हुए कहा कि डिप्टी सीएम ने हमें आश्वासन दिया और कहा कि कंपनी से बात हो गई है, हमारे सामने कंपनी को फोन किया गया और कहा गया कि अब जॉइनिंग करो, लेकिन जब हम कंपनी के गेट पर आए तो कंपनी के लोग कहने लगे कि ऐसे मंत्री बहुत आते-जाते हैं। हम सरकार और मंत्री को पैसा देते हैं। कंपनी के गार्ड भी कहते हैं कि मंत्री बहुत आते-जाते हैं। वे डिप्टी सीएम की बात भी नहीं मानते। अब सवाल यह है कि कंपनी बड़ी है या सरकार बड़ी है?

कोविड में जान हथेली पर रखकर की सेवा

हम लोग 2012 से लगातार उत्तर प्रदेश की जनता की सेवा कर रहे हैं। दो-दो कोविड काल में अपनी जान हथेली पर रखकर प्रदेशवासियों की सेवा की, लेकिन इनाम क्या मिला? 2021 में हम लोगों को बेरोजगार कर दिया गया। करीब नौ हजार कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया।

गेट पर ताला लगाकर भागे

शरद ने कहा कि आज कंपनी के लोगों ने गेट पर ताला और शटर डाल दिया और भाग गए। अगर वे गलत नहीं हैं, तो हमसे बात क्यों नहीं करते? वे इसलिए भाग रहे हैं, क्योंकि हमारे आरोप हैं कि यहां भ्रष्टाचार चरम पर है। कंपनी नए लोगों को भर्ती करती है और पुराने कर्मचारियों को निकाल देती है। इसी के विरोध में हमारे करीब चार हजार कर्मचारी कंपनी के गेट पर बैठे हैं और न्याय की मांग कर रहे हैं।

कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की मांग

संजीव सिंह ने आरोप लगाया कि जीवीके ईएमआरआइ कंपनी हठधर्मिता पर उतर आई है और डिप्टी सीएम के आदेश के बावजूद कर्मचारियों को नौकरी पर वापस नहीं रख रही। बिना नोटिस नौकरी से निकालने और फुल एंड फाइनल भुगतान नहीं करने का आरोप लगाते हुए संजीव सिंह ने सरकार से कंपनी के खिलाफ कार्रवाई कर उसे ब्लैकलिस्ट करने की मांग की। साथ ही कंपनी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि कर्मचारियों को नौकरी नहीं देनी है, तो उनकी डीडी लौटाकर बकाया भुगतान किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के बावजूद कंपनी का कर्मचारियों से बात न करना और आदेशों की अनदेखी करना गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रदर्शन में आए संजीव सिंह ने सरकार से कंपनी के खिलाफ कार्रवाई कर उसे ब्लैकलिस्ट करने की मांग की।

की समायोजन व न्याय देने की मांग

वहीं प्रदर्शन में शामिल प्रदीप चौधरी ने बताया कि कर्मचारियों की समस्याओं पर बातचीत के लिए पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बनाया गया था। दो अक्टूबर से धरने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने उन्हें वार्ता के लिए बुलाया और टीवीएस रेड्डी से फोन पर बात कराई। कंपनी ने कर्मचारियों की सूची लेकर दो दिन में जवाब देने का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक कोई संदेश नहीं मिला। आगे कहा कि पांच से छह अक्टूबर से प्रतिनिधिमंडल लगातार कंपनी के अधिकारियों से संपर्क कर रहा है। प्रदीप ने टीवीएस रेड्डी से कर्मचारियों के बीच खुली बैठक कर उनकी समस्याएं सुनने, समायोजन करने और न्याय देने की मांग की।

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