आरयू ब्यूरो, लखनऊ। पिछले 40 दिनों से वेतन में समानता और बकाया एरियर के भुगतान की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे बॉन्डेड एमबीबीएस डॉक्टरों का प्रदर्शन मंगलवार उस समय उग्र हो गया, जब पुलिस उन्हें हिरासत में लेने के लिए बस लेकर पहुंची।हजरतगंज में गांधी प्रतिमा के पास प्रदर्शन कर रही कई डॉक्टर पुलिस की बस के आगे लेट गईं। उन्होंने कहा, “ऊपर चढ़ा दो, हम नहीं हटेंगी।”
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वहीं प्रदर्शन कर रहे कुछ डॉक्टरों ने बस को हाथों से धक्का देकर रोकने की कोशिश की और पुलिस से कहा कि अब गाड़ी चलाकर दिखाओ। डॉक्टरों आरोप है कि डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने मांगें पूरी करने और 24 घंटे में शासनादेश जारी कराने का भरोसा दिया था, लेकिन 40 दिन बीतने के बाद भी आदेश जारी नहीं हुआ। डॉक्टरों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा।
डिप्टी सीएम से की थी मुलाकात
डॉक्टरों के मुताबिक दो सितंबर को भी उन्होंने हजरतगंज में जीपीओ पर करीब एक घंटे तक प्रदर्शन किया था। उस दौरान वेतन में अंतर को लेकर नारेबाजी की गई और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मुलाकात की मांग की गई थी। डॉक्टरों का दावा है कि इसके बाद ब्रजेश पाठक बारिश में भीगते हुए गांधी प्रतिमा पहुंचे और करीब 20 मिनट तक उनसे बातचीत की।
आश्वासन के बाद भी नहीं जारी हुआ शासनादेश
बातचीत के दौरान डिप्टी सीएम ने बताया था कि मांगों से जुड़ी पत्रावली पूरी हो चुकी है। उन्होंने अगले दिन दोपहर दो बजे तक समान वेतन समेत सभी मांगों को पूरा करने वाला शासनादेश जारी होने का भरोसा दिया था। डॉक्टरों के अनुसार डिप्टी सीएम के इस आश्वासन के बाद उन्होंने अपना प्रदर्शन खत्म कर दिया था। हालांकि, उनका आरोप है कि इसके बाद भी शासनादेश जारी नहीं हुआ। डॉक्टरों ने इसे वादा पूरा न करना बताया और कहा कि इतने दिन बीत जाने के बावजूद मांगें लंबित रहना अफसोस की बात है।
दूसरे डॉक्टरों को 1.10 लाख तक
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि, बॉन्ड सेवा के तहत उन्हें दो साल की अनिवार्य सेवा करनी होती है या दस लाख रुपये के बॉन्ड की बाध्यता होती है। इसके तहत उन्हें ग्रामीण और दुर्गम इलाकों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं देनी पड़ती हैं। इसके बदले उन्हें करीब 50 से 55 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। वहीं, इसी एमबीबीएस डिग्री, समान बॉन्ड, काउंसलिंग और प्रक्रिया के तहत सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बॉन्ड सेवा कर रहे डॉक्टरों को करीब 1.10 लाख रुपये प्रतिमाह तक पारिश्रमिक दिया जा रहा है। डॉक्टरों ने इसे वेतन में गंभीर असमानता बताते हुए सभी के लिए समान वेतनमान लागू करने और बकाया एरियर का भुगतान करने की मांग की है।
मालूम हो कि यह प्रदर्शन प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में वर्ष 2018, 2019 और 2020 बैच के बॉन्डेड एमबीबीएस डॉक्टर कर रहे हैं। उनका आरोप है कि डिग्री, बॉन्ड और सेवा की शर्तें समान होने के बावजूद उन्हें अलग-अलग वेतन दिया जा रहा है। डॉक्टर समान वेतनमान लागू करने और बकाया एरियर देने की मांग कर रही हैं।




















