आरयू ब्यूरो, लखनऊ। मशहूर शायर मुनव्वर राना की बेटी सुमैया राना पर पुलिस ने रविवार को कैसरबाग थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। साथ ही दस लाख का मुचलका भरने और एसीपी कैसरबाग की कोर्ट में पेश होने के लिए भी कहा गया है। वहीं सुमैया ने पुलिस पर तीन दिनों तक अवैध रूप से बंधक बनाकर रखने के आरोप लगाया। साथ ही कहा कि मैं न्याय मांगने गई थी, मुझे ही अपराधी बना दिया गया।
वहीं कैसरबाग इंस्पेक्टर अंजनी कुमार मिश्रा ने मीडिया को बताया कि सुमैया राना के खिलाफ विधिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस को अंदेशा था कि सुमैया नीतीश कुमार और संजय निषाद के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए विधानसभा का घेराव कर सकती हैं। कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के नाम पर पुलिस ने उन्हें घर से बाहर निकलने से रोका था। अब शातिभंग समेत विभिन्न धाराओं में उनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया है। समुैया को नोटिस भेजकर दस लाख का मुचलका भरने के लिए कहा गया है। सोमवार को एसीपी कैसरबाग की कोर्ट में पेश होने के भी आदेश हैं।
कार्रवाई की जगह मुझ पर ही मुकदमा: सुमैया
वहीं सुमैया राना का आरोप है कि कानून-व्यवस्था और शांति बनाए रखने के नाम पर पुलिस ने उन्हें घर से बाहर निकलने से रोका था। उन्हें तीन दिनों तक उनके ही घर में अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया। सख्त पहरा बैठा कर उन्हें किसी के जनाजे में भी शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई। सुमैया के मुताबिक उन्होंने बिहार के हिजाब मामले में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और यूपी के मंत्री संजय निषाद के खिलाफ तहरीर दी थी। मामले में पुलिस ने उन पर कार्रवाई करने के बजाय उल्टा उन्हीं पर मुकदमा दर्ज कर लिया। वह इसी मामले में पुलिस कमिश्नर से मिलने जा रहीं थीं। इस दौरान पुलिस ने कैसरबाग स्थित उनके आवास पर उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया। गुरुवार से लेकर शनिवार तक पुलिस ने बाहर नहीं निकलने दिया।
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इस दौरान सुमैया ने कहा कि मैं न्याय मांगने गई थी, मुझे ही अपराधी बना दिया गया। सुमैया ने पुलिस की इस कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर कर कहा कि यह उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से महिलाओं के दमन का जीता-जागता उदाहरण है। अगर सत्ता के दुरुपयोग का सबक सीखना है तो भाजपा सरकार से सीखा जा सकता है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो व्यक्ति एफआइआर की मांग कर रहा है, पुलिस उल्टा उसी पर मुकदमा लाद रही है।



















