आरयू ब्यूरो,
लखनऊ। लंबे समय से नियमित किए जाने की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे शिक्षामित्रों ने बुधवार को विधानसभा के सामने प्रदर्शन कर एक बार फिर सूबे की राजधानी में अपनी आवाज उठाई है।
आम शिक्षक/शिक्षामित्र एसोसिएशन के आह्वान पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आज सुबह ही हजरतगंज पहुंचे शिक्षामित्रों ने विधानसभा घेराव की रणनीति बनानी शुरू कर दी थी, हालांकि शिक्षामित्रों के विधानसभा घेराव की जानकारी पर पुलिस और प्रशासन के अफसर भी सुबह से ही उन्हें रोकने के लिए सक्रिय हो गए थे।

पूर्वान्ह करीब 11 बजे हाथों में बैनर पोस्टर लिए महिला व पुरुष शिक्षामित्रों के हुजूम ने विधानसभा के पास नारेबाजी शुरू कर दी। जिसके बाद पुलिस ने उन्हें किसी तरह से हटाया तो वो भाजपा के प्रदेश मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने लगे। वहां भी हजरतगंज पुलिस से धक्का–मुक्की बाद नारेबाजी करते शिक्षामित्र हजरतगंज चौराहे के पास पहुंचें और सड़क पर ही प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिसके चलते कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ।
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प्रदर्शनकारियों द्वारा चक्काजाम की आशंका पर वहां पहुंची पुलिस ने एक बार उन्हें सड़क से खदेड़ते हुए जीपीओ पार्क में भेज दिया। यहां गांधी प्रतिमा के नीचे भी काफी देर तक शिक्षामित्रों का प्रदर्शन चलता रहा। एडीएम, सीओ हजरतगंज और इंस्पेक्टर हजरतगंज के भी समझाने पर शिक्षामित्र अनुसूचि नौ की मांग करते रहें।

हजरतगंज क्षेत्र में करीब चार घंटें चले शिक्षामित्रों के प्रदर्शन के बाद हजरतगंज पुलिस ने महिला पुलिस बल को साथ लेकर शिक्षामित्रों को जबरदस्ती बसों में बैठाना शुरू कर दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों की पुलिस से जमकर धक्का-मुक्की भी हुई, लेकिन शिक्षामित्रों पर पुलिस ने काबू पाते हुए उन्हें बसों में भरकर ईको गार्डेन पहुंचवा दिया। जहां रात तक शिक्षामित्रों का प्रदर्शन जारी रहा।
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वहीं आज हजरतगंज में प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा शिक्षामित्रों पर मुकदमा दर्ज किए जाने की बात कहे जाने पर प्रदर्शनकारी भड़क गए। आम शिक्षक/शिक्षामित्र एसोसिएशन की अध्यक्ष उमा देवी ने इंस्पेक्टर हजरतगंज से कहा कि शिक्षामित्र पहले ही सरकार की अन्यायपूर्ण कार्यप्रणाली के चलते तिल-तिलकर मर रहा है, समायोजन रद होने के बाद से करीब 11 सौ शिक्षामित्रों की जानें जा चुकी हैं, ऐसे हालात में आज पुलिस शिक्षामित्रों को गोली ही क्यों नहीं मार देती है।
महिला शिक्षामित्र की बिगड़ी तबियत, भर्ती
प्रदर्शन के दौरान आज बहराइच से प्रदर्शन में शामिल होने के लिए पहुंची शिक्षामित्र सुचिता उपाध्याय की तबियत बिगड़ गयी। सुचिता के बेहोश होने पर शिक्षामित्रों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया। जहां हालात सुधरने पर डॉक्टरों ने उन्हें देर शाम छुट्टी दे दी।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही उमा देवी ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर करते हुए मीडिया से कहा कि सरकार शिक्षामित्रों का अधिकार छीनने के साथ ही पुलिस के बल पर शिक्षामित्रों की आवाज को दबाना चाहती है, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिक्षामित्र अनुसूचि नौ की अपनी मांग को पूरी कराने के बाद अपने सम्मान को हासिल करके ही रहेंगे।

वहीं इंस्पेक्टर हजरतगंज राधारमण सिंह ने बताया कि शिक्षामित्र बिना अनुमति के प्रदर्शन कर रहे थे, जिसके चलते उन्हें बसों से ईको गार्डेन पहुंचाया गया है। किसी शिक्षामित्र के खिलाफ कोई मुकदमा नहीं दर्ज हुआ है।
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प्रदर्शन में संगठन की पदाधिकारी मनोरमा ओझा, रविंद्र सिंह, राम सिंह, दिनेश चंद्र ओझा, मीरा सिंह समेत सैकड़ों शिक्षामित्रों के अलावा उनके समर्थन में पहुंचे दिव्यांग छात्र विवेक मणि त्रिपाठी, सुरेंद्र भारती, कृष्ण कुमार पांडेय सहित अन्य लोग भी मौजूद रहें।
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विधानसभा के सामने शिक्षामित्रों ने किया प्रदर्शन, पुलिस से हुई धक्का-मुक्की, भड़के शिक्षामित्रों ने कहा मार दो गोली, देखें तस्वीरें https://t.co/c4Ewsprdof via @rajdhaniupdate @shikshamitra_in #shikshamitra #शिक्षामित्र
— Rajdhani Update (@rajdhaniupdate) February 20, 2019




















