आरयू वेब टीम। देश में काफी समय से बहस चल रही है कि पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट से पुरानी गाड़ियों को नुकसान पहुंच रहा है। इस बीच केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि अभी पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल की मिलाने का एक्सपेरिमेंट चल रहा है और इसके नतीजे अगले साल तक आएंगे।
सरकार ने यह कहकर ऐसे आशंकाओं को खत्म करने की कोशिश की है कि ई20 पेट्रोल से मैकेनिकल डैमेज होता है, ऐसे कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं हैं। यह नीति भारत की ऊर्जा सुरक्षा, किसानों और पर्यावरण के लिए फायदेमंद साबित होगी। अटार्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा दायर की गई एक याचिका पर बहस के दौरान यह टिप्पणी की, जिसमें कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।
हाई कोर्ट ने अपने 23 जून के आदेश में, तेल कंपनियों- बीपीसीएल, एचपीसीएल और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन को निविदा को अंतिम रूप देने से पहले एथेनॉल आवंटन में वृद्धि की मांग करने वाली एक डिस्टिलरी द्वारा दायर आवेदन पर विचार करने और फैसला लेने का निर्देश दिया। हालांकि बीपीसीएल ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि हाई कोर्ट के आदेश से पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण प्राप्त करने के सरकार के व्यापक नीतिगत उद्देश्य पर प्रभाव पड़ सकता है।
अटॉर्नी जनरल ने कहा, ‘सरकार 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का प्रयोग कर रही है। अगले साल तक हमें इसके परिणाम मिल जाएंगे।’ सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि बीपीसीएल ने इस आदेश के खिलाफ कर्नाटक हाई कोर्ट की खंडपीठ से संपर्क क्यों नहीं किया। इसके जवाब में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि एथेनॉल आपूर्ति अनुबंध अक्टूबर 2025 में पहले ही अंतिम रूप दिए जा चुके थे और इसी तरह की याचिकाएं कई हाई कोर्ट में लंबित हैं। उन्होंने कहा, ‘इससे राष्ट्रीय नीति प्रभावित होगी।’
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अटॉर्नी जनरल ने ट्रांसफर पिटीशन दायर करने की अनुमति मांगी, यह तर्क देते हुए कि इस मुद्दे को अक्टूबर से पहले तय करने की आवश्यकता है, जब एथेनॉल सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट्स के रिन्यूवल का समय आएगा। उन्होंने कहा, ‘अगर मैं डिवीजन बेंच के सामने जाता हूं और फिर दूसरे हाई कोर्ट में जाता हूं तो इसमें देरी होगी।’
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