आरयू ब्यूरो, लखनऊ। अयोध्या के राम मंदिर से करोड़ों की चढ़ावा चोरी मामले पर बयानबाजी का दौर जारी है। इस बीच मंगलवार को बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी लोगों के लंबे इंतजार के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। हालांकि मायावती ने अन्य विपक्षी दलों के तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ के अलावा भाजपा-आरएसएस को इस मामले से जोड़ते हुए नाम नहीं लिया है। बसपा मुखिया ने कहा कि “ऐसे लोग कतई भी बख्शे नहीं जाने चाहिए, लेकिन इस मामले का राजनीतिकरण करना भी ठीक नहीं।”
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मायावती ने आज अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्टकर कहा कि “अयोध्या में राम मंदिर से चढ़ावे की हुई चोरी, गबन व हेरा-फेरी आदि करने की मीडिया में आए दिन किस्म-किस्म की आ रही खबरें अति-गंभीर व चिंतनीय हैं। साथ ही, अब यहां मंदिर में श्रद्धा के चढ़ावे आदि में आगे कोई भी शिकायत ना आए, इसके लिए देश के दूसरे विख्यात व प्रसिद्ध मंदिरों में चढ़ावे आदि के हिसाब-किताब के लिए जो वहां व्यवस्था है तो उनका यहां अयोध्या में भी अनुशरण करके इस प्रकरण को जल्दी ही सुलझाना चाहिए तो यह उचित होगा।”
इस दौरान बसपा प्रमुख ने कहा कि देश में राजनीति का अपराधीकरण व अपराध का राजनीतिकरण तथा धर्म का राजनीतिकरण एवं राजनीति का अंध धर्मीकरण ना किया जाये तो यह सही व संवैधानिक होगा, ऐसी बीएसपी की राजनीतिक पार्टियों को देश व जनहित में सलाह और साथ ही देशवासियों से भी यह अपील।
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बता दें कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आठ आरोपितो को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार किए गए आठ आरोपितों को सोमवार (29 जून) को अयोध्या की एक अदालत में पेश किया गया। साथ ही आरोपितों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया था, जहां से सभी आरोपितों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस मामले में सभी आरोपियों को अब 13 जुलाई को कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा। कोर्ट में पुलिस ने कहा कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है।



















