आरयू वेब टीम। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि की चोरी और वित्तीय गड़बड़ियों का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अधिवक्ता अनूप अवस्थी ने इस मामले में अदालत से स्वतः संज्ञान लेने और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। साथ ही याचिका में एफआइआर दर्ज करने तथा जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए न्यायालय की निगरानी में जांच के निर्देश देने की भी मांग की गई है।
दरअसल मामले की सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के समक्ष गुहार लगाई गई। हालांकि, सीजेआई ने वकीलों से मौखिक मेंशनिंग से बचने का अनुरोध करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में लिखित नोट प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने कहा कि अदालत जमानत, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अन्य जरूरी मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सूचीबद्ध करेगी तथा प्रस्तुत अनुरोधों पर आवश्यकतानुसार विचार किया जाएगा।
सरकारी बयान के मुताबिक, सोशल मीडिया पर दानपात्रों को लेकर फैल रही चर्चाओं और आरोपों को गंभीरता से लेते हुए ट्रस्ट ने निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने का अनुरोध किया था। वहीं, विवाद के बीच राम मंदिर निर्माण समिति के प्रमुख नृपेंद्र मिश्र ने कहा कि उनकी भूमिका केवल निर्माण कार्यों की निगरानी तक सीमित है। उन्होंने दान राशि में कथित हेराफेरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
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इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि भगवान राम से जुड़े पवित्र कार्यों के लिए दिए गए दान और चढ़ावे के दुरुपयोग की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भी इस मुद्दे को लगातार उठाया है। दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह राम मंदिर को लेकर अफवाहें फैलाने और भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।




















