आरयू ब्यूरो, लखनऊ। नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद शुक्रवार को अपने काफिले के साथ सहारनपुर से मेरठ की ओर जा रहे थे। तभी रोहाना टोल प्लाजा पर पुलिस ने चंद्रशेखर के काफिले की कुछ गाड़ियों को रोक दिया। इसके बाद चंद्रशेखर आजाद खुद गाड़ी से उतरकर पुलिसकर्मियों के पास पहुंचे और दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। काफी देर तक टोल प्लाजा पर चले विवाद के बाद चंद्रशेखर आजाद का काफिले के साथ मेरठ पहुंचे।
इस दौरान चंद्रशेखर ने कहा कि पूरे देश को पता है कि मेरठ में क्या हुआ। वह किसी से छिपकर नहीं जा रहे हैं, बल्कि सबको बताकर जा रहे हैं। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक देश में जिस तरह का व्यवहार हुआ, वह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जब इतने बड़े पद पर बैठे अधिकारी इस तरह का व्यवहार करेंगे तो लोगों के मन में डर और चिंता होना स्वाभाविक है। दरअसल चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि अगर उन्हें रोका जा रहा है तो इसका जवाब पुलिस को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस आखिर क्या छिपाना चाहती है और उन्हें रोकने की वजह क्या है। उन्होंने कहा कि इसका जवाब उनसे नहीं बल्कि पुलिस से पूछा जाना चाहिए।
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चंद्रशेखर ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ हुई कथित बदसलूकी को लेकर वह एसएसपी से जवाब मांगेंगे कि ऐसा क्यों हुआ और इसके पीछे किसका हाथ है। उन्होंने यह भी कहा कि वह पीड़ित परिवार से भी मुलाकात करेंगे। साथ ही चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उनका स्पष्ट मानना है कि कोई निर्दोष जेल नहीं जाना चाहिए और कोई दोषी बचना भी नहीं चाहिए।
किसी के पास नहीं थे हथियार
वहीं एसएसपी के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि संबंधित अधिकारी का व्यवहार गरिमापूर्ण नहीं था। अगर कोई अधिकारी सिर्फ नारेबाजी से डर जाता है तो ये चिंता का विषय है। उनका कहना था कि जब किसी के पास हथियार नहीं थे और केवल नारेबाजी हो रही थी, तब इस तरह का व्यवहार उचित नहीं कहा जा सकता। साथ ही कहा कि ऐसे अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
अपनाएं संघर्ष का रास्ता
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। लोगों से संघर्ष करने और कानूनी रास्ता अपनाने की अपील करते हुए चंद्रशेखर ने कहा कि अदालतें खुली हैं और बड़े अधिकारी भी मौजूद हैं। अगर किसी के साथ अन्याय होता है तो उसे लड़ाई लड़नी चाहिए, क्योंकि अगर पीड़ित ही हार मान लेगा तो उसके लिए न्याय की लड़ाई कौन लड़ेगा। नगीना सांसद ने आगे कहा कि जिन लोगों के साथ अन्याय हुआ है, उनकी पीड़ा को वह महसूस करते हैं। उनका कहना था कि अगर अधिकारियों ने समय रहते लोगों की बात सुन ली होती तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती।
अधिकारियों-पीड़ित परिवार से मिलने की कही बात
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वह एक संवैधानिक पद पर हैं और अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए अधिकारियों से भी मिलेंगे और पीड़ित परिवार से भी मुलाकात करेंगे। साथ ही कहा कि वह पीड़ितों की बात सुनेंगे, बड़े अधिकारियों से चर्चा करेंगे और यदि बातचीत से समाधान नहीं निकला तो आगे की रणनीति बनाई जाएगी चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि पुलिस की जांच पर सवाल तब खड़े होते हैं जब अधिकारियों का व्यवहार इस तरह का होता है।
अधिकारी का व्यवहार बेहद चिंताजनक
उन्होंने कहा कि अगर पीड़ित परिवार को पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं हो रहा है तो इसकी वजह अधिकारियों का आचरण भी है। उन्होंने कहा कि सड़क किसी के बाप की नहीं है जैसी भाषा का इस्तेमाल करने वाले अधिकारी का व्यवहार बेहद चिंताजनक है। उनके मुताबिक जिले के सर्वोच्च पद पर बैठे अधिकारी की ऐसी भाषा पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े करती है।




















