आरयू ब्यूरो, लखनऊ। समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतों को गिराने के आदेश के बाद योगी सरकार विपक्ष के निशाने पर आ गई है। अखिलेश यादव के बाद इस प्रस्तावित कार्रवाई पर ऐतराज जताते नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा है। साथ ही कहा कि अगर अदालत के अंतिम फैसले से पहले प्रशासन ने बुलडोजर चलाया, तो ये सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना होगी।
चंद्रशेखर आजाद ने शुक्रवार को अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्टकर कहा जौहर विश्वविद्यालय पर बुलडोजर कार्रवाई का आदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सांप्रदायिक राजनीति की पराकाष्ठा है। सबसे चिंताजनक बात ये है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय की ‘बुलडोजर कार्रवाई’ पर कई बार फटकार के बाद भी योगी सरकार इस तरह की कार्रवाइयों से बाज नहीं आ रही है।
जौहर विश्वविद्यालय के मामले में रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा प्रशासनिक स्तर पर ये आदेश पारित किया गया है। प्रशासनिक आदेश न्यायालय के अंतिम निर्णय का विकल्प नहीं हो सकता। यदि विश्वविद्यालय इस आदेश से असहमत है, तो उसे सक्षम न्यायालय में अपनी बात रखने और न्याय प्राप्त करने का पूरा अधिकार है। ऐसे में अंतिम न्यायिक निर्णय से पहले किसी भी प्रकार की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई माननीय सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना होगी।
साथ ही चंद्रशेखर ने कहा कि विडंबना ये है कि यूजीसी द्वारा जारी फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, प्रयागराज, गौतमबुद्धनगर और राजधानी लखनऊ तक के संस्थान शामिल हैं, लेकिन उन पर कठोर कार्रवाई के बजाय एक स्थापित विश्वविद्यालय को बुलडोजर के निशाने पर खड़ा किया जा रहा है। ये सरकार की मंशा और दोहरे मापदंडों पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
इस दौरान आजाद समाज पार्टी के मुखिया ने कहा कि यूपी गवर्नमेंट से हमारी मांग है कि ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए, विश्वविद्यालय को सभी वैधानिक एवं न्यायिक उपाय अपनाने का पूरा अवसर दिया जाए तथा न्यायालय के अंतिम निर्णय का सम्मान किया जाए।




















