रेप केस में हाई कोर्ट ने तरुण तेजपाल को सुनाई दस साल की सजा, भारी जुर्माना भी लगाया

तरुण तेजपाल
तरुण तेजपाल। (फाइल फोटो)

आरयू वेब टीम। बंबई उच्च न्यायालय ने समाचार पत्रिका ‘तहलका’ के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को 2013 में अपनी एक सहकर्मी से दुष्कर्म का दोषी ठहराते हुए दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने गोवा की एक सत्र अदालत द्वारा पांच साल पहले बरी करने के फैसले को भी रद्द कर दिया है।

अदालत की गोवा पीठ की न्यायमूर्ति नीला गोखले और न्यायमूर्ति अमित जामसांडेकर ने पहले तरुण तेजपाल को दो सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था, लेकिन उनके वकीलों के अनुरोध पर अदालत ने ये अवधि बढ़ाकर चार सप्ताह कर दी। साथ ही कोर्ट ने न्यूनतम सजा सुनाते हुए कहा कि ये घटना 13 वर्ष पहले हुई थी और तब से तेजपाल ने कोई अन्य अपराध नहीं किया है। यह भी कहा, ‘‘संभव है कि पीड़िता और तेजपाल, दोनों अब अपने-अपने जीवन में आगे बढ़ चुके हों।’’

इस दौरान उच्च न्यायालय ने तेजपाल पर 10,21,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और निर्देश दिया कि यह पूरी राशि पीड़िता को दी जाएगी। पीठ ने कहा, ‘‘यौन उत्पीड़न की पीड़िता को जुर्माने की पूरी राशि सौंपी जाएगी।’’ वहीं सुनवाई के दौरान तेजपाल ने स्वयं को ‘‘राजनीतिक प्रताड़ना का शिकार’’ बताया और दो बेटियों का पिता होने का हवाला देते हुए कोर्ट से नरमी बरतने की अपील की।

वहीं गोवा सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अधिकतम सजा की मांग करते हुए कहा कि इससे यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि ‘‘नहीं का मतलब नहीं’’ (शारीरिक संबंध के लिए सहमति नहीं देना) होता है। पीठ ने कहा, ‘‘हम निचली अदालत के बरी करने के आदेश को निरस्त करते हैं। प्रतिवादी (तरुण तेजपाल) को दोषी करार देते हैं।’’

अदालत ने तेजपाल को भारतीय दंड संहिता (भादसं) की धारा 376(2)(एफ) (संरक्षक या विश्वास अथवा प्राधिकार की स्थिति में रहने वाले व्यक्ति द्वारा महिला से दुष्कर्म), धारा 354(ए) (यौन उत्पीड़न) और धारा 354(बी) (महिला को निर्वस्त्र करने के इरादे से उसके खिलाफ आपराधिक बल प्रयोग) के तहत दोषी करार दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में करेंगे अपील

तरुण तेजपाल के वकील आबाद पोंडा ने न्यूनतम सजा देने का अनुरोध करते हुए अदालत से यह भी आग्रह किया था कि सजा और दोषसिद्धि पर कम से कम 10 सप्ताह के लिए रोक लगाई जाए, ताकि उच्चतम न्यायालय में अपील दायर करने का समय मिल सके।  बाद में पत्रकारों से बातचीत में तेजपाल ने कहा, ‘‘हम इस आदेश के खिलाफ अपील करेंगे। हमारा मानना है कि यह फैसला गलत है। हम इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख करेंगे।’’

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यह मामला नवंबर 2013 में गोवा में आयोजित ‘थिंकफेस्ट’ कार्यक्रम के दौरान एक होटल की लिफ्ट में तेजपाल की एक पूर्व कनिष्ठ महिला सहकर्मी के कथित यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म से संबंधित है। निचली अदालत ने 2021 में तेजपाल को इस मामले में बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ गोवा सरकार ने बंबई उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। तेजपाल के वकील पोंडा ने कहा, ‘‘वह मुकदमे की शुरुआत से ही जमानत पर हैं और उन्होंने कभी जमानत की किसी शर्त का उल्लंघन नहीं किया है। वह वरिष्ठ नागरिक हैं।’’

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