रेप केस में तरुण तेजपाल ने किया सरेंडर, सुप्रीम कोर्ट ने दी थी तीन हफ्ते की मोहलत

तरुण तेजपाल
तरुण तेजपाल। (फाइल फोटो)

आरयू वेब टीम। तहलका के पूर्व एडिटर-इन-चीफ तरुण तेजपाल ने 2013 के रेप केस में सोमवार को गोवा की मापुसा अदालत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद सरेंडर किया है, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि बॉम्बे हाईकोर्ट के दोषसिद्धि वाले फैसले के खिलाफ उनकी अपील पर सुनवाई से पहले उन्हें सरेंडर करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने तेजपाल की सरेंडर से छूट की मांग वाली याचिका खारिज करते हुए तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।

वहीं सरेंडर के बाद तेजपाल ने कहा कि वह बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे। दरअसल मामला नवंबर 2013 का है। जिसमें एक महिला पत्रकार ने तरुण तेजपाल पर आरोप लगाया था कि सात और आठ नवंबर 2013 को गोवा के एक होटल की लिफ्ट के अंदर तरुण ने उसका यौन उत्पीड़न किया। इन आरोपों के बाद तेजपाल को 30 नवंबर 2013 को गिरफ्तार किया गया था। मामले की सुनवाई के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने तेजपाल को दोषी ठहराया था।

इसी फैसले के खिलाफ तरुण तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। तेजपाल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इस अपील पर सुनवाई की मांग की जा रही है।तेजपाल ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर सरेंडर करने से छूट मांगी थी। उनका कहना था कि उनकी अपील को पहले सुप्रीम कोर्ट में सूचीबद्ध किया जाना चाहिए और उस पर सुनवाई होनी चाहिए। इसके बाद सरेंडर की जरूरत पर फैसला किया जाए।

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तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी थी कि उचित मामले में अदालत के पास सरेंडर की अनिवार्यता से छूट देने का अधिकार है। साथ ही कहा था कि आरोपित के सरेंडर किए बिना भी अदालत आपराधिक अपील को सूचीबद्ध कर सकती है। सिब्बल ने ये भी कहा था कि तेजपाल की अपील बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देती है, जिसमें उनकी बरी किए जाने की स्थिति को पलट दिया गया था। उनका कहना था कि अपील के गुण-दोष पर विचार किया जाना जरूरी है।

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