आरयू वेब टीम। दिल्ली के आस्था कुंज में गैंगरेप की घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि इन घटनाओं से 2012 के निर्भया कांड की दर्दनाक समानताएं सामने आती हैं। जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा कि ये घटनाएं कानून-व्यवस्था लागू करने वाली एजेंसियों की विफलता को स्पष्ट रूप से उजागर करती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर की रेप की घटनाओं पर कहा कि सार्वजनिक स्थानों, जिनमें पार्क और बसें शामिल हैं वहां रोशनी की अपर्याप्त व्यवस्था, कमजोर निगरानी और अन्य प्रशासनिक सुविधाओं की कमी के कारण उच्च जोखिम वाले क्षेत्र बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। कोर्ट ने कहा कि केवल एकजुटता व्यक्त करना पर्याप्त नहीं है।
साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये जरूरी है कि इस मामले में आवश्यक जवाबदेही तय की जाए। कोर्ट ने इस मुद्दे पर स्वत: संज्ञान का मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। दरअसल राजधानी दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में 17 वर्षीय किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म मामला सामने आया था। इसमें मामले में गिरफ्तार आसिफ, हेमंत और मुकेश को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
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गौरतलब है कि अगस्त में भी दिल्ली-एनसीआर में चलती बस में एक नाबालिग से रेप की घटना हुई थी. करीब 47 किलोमीटर तक चलती बस के दौरान लड़की से रेप किया गया। इस दौरान न तो पुलिस की नजर पड़ी न ही बस को किसी नाके पर रोका गया। पुलिस ने बताया था कि ये घटना चार अगस्त को ग्रेटर नोएडा में परी चौक के पास हुई थी। पीड़िता ने शिकायत में आरोप लगाया था कि दो आरोपितों ने उसके साथ यौन उत्पीड़न किया और विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी। बाद में उन्होंने लड़की को दिल्ली में कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया। आरोपितों की पहचान ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप के तौर पर हुई थी। पुलिस ने दोनों को तिमारपुर के एक पार्किंग एरिया से गिरफ्तार कर लिया था।
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