15 बेगुनाहों की जान लेने वाली अलीगंज की अवैध बिल्डिंग 15 दिन और रहेगी तनी, जांच की आग भी धधकने से पहले हो रही ठंडी!

जानलेवा बिल्डिंग
अवैध बिल्डिंग पर नोटिस चस्‍पा कराने के बाद फोटो खिचाते जोनल अधिकारी माधवेश कुमार साथ में अन्‍य।

आरयू ब्‍यूरो, लखनऊ। राजधानी लखनऊ समेत देशभर को दहला देने वाले अलीगंज अग्निकांड की वजह बनी अवैध बिल्डिंग अभी 15 दिन और तनी रहेगी। 15 बेगुनाह युवाओं की जान लेने वाले अग्निकांड के 19 दिन बाद इस अवैध बिल्डिंग के ध्‍वस्‍तीकरण का आदेश लखनऊ विकास प्राधिकरण के विहित प्राधिकारी कर सके हैं। आदेश के अनुसार अवैध निर्माण कराने वालों ने बिल्डिंग नहीं तोड़ी तो एलडीए ध्‍वस्‍तीकरण की कार्रवाई कर इसमें होने वाले खर्च की वसूली करेगा।

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दूसरी ओर लखनऊ के इतिहास में सबसे ज्‍यादा जनहानि करने वाले अग्निकांड के गुनाहगारों को चिन्हित करने की जांच भी एसआइटी पूरी नहीं कर सकी है। 15 परिवारों को कभी नहीं भरने वाला जख्‍म देने वाले अग्निकांड के बाद मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ की खुद मौके पर मौजूदगी और डिप्‍टी सीएम ब्रजेश पाठक के आंसुओं को देख अंदाजा लगाया जा रहा था कि दो-चार दिन में इस भयावह अग्निकांड के लिए जिम्‍मेदार एलडीए समेत अन्‍य विभागों के कर्मी, इंजीनियर, जोनल अफसर समेत आइएएस अधिकारियों तक पर बड़ी कार्रवाई की जायेगी, हालांकि 19 दिन बाद भी छिटपुट कार्रवाई के अलावा बड़ों पर गाज नहीं गिरने से अंदाजा लगाया जा रहा कि किसी न किसी स्‍तर पर 15 परिवारों के शातिर गुनाहगारों को बचाने की जुगत भी चल रही है। दूसरी ओर एलडीए भी अवैध कोचिंग व अन्‍य संस्‍थानों के खिलाफ 21 दिन का अभियान चलाने का ऐलान करने के बाद चार दिन में ही बैकफुट पर आ गया था।

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इन अफसर-इंजीनियरों को बचाना होगा मुश्किल

वहीं जानकारों की मानें तो 15 परिवारों के उन दोषियों को भी कम से कम बचाना संभव नहीं होगा, क्षेत्र में जिनकी तैनाती के समय अलीगंज अग्निकांड हुआ। क्‍योंकि बीती तीन जून को दिल्‍ली के मालवीय नगर अग्निकांड में 21 लोगों की मौत के बाद इसी तरह की अवैध बिल्डिंगों पर कार्रवाई करने का आदेश लखनऊ में भी जारी किया गया था, मीटिंग और मीडियाबाजी के बाद जिम्‍मेदार अफसर-इंजीनियर लापरवाही या अवैध निर्माण से होने वाली लाखों की वसूली के चलते बैठे रहें और शहर के बीचोंबीच 22 जून को लगभग मालवीय नगर जैसा ही अग्निकांड हो गया, जिसमें 15 युवाओं की मौत हो गयी।

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तत्‍कालीन दोषियों पर भी होगी चारबाग व लिवाना जैसी कार्रवाई!

इसके अलावा जिन अफसर-इंजीनियर की पोस्टिंग के दौरान अलीगंज का जानलेवा अवैध निर्माण किया गया था, उन्‍हें भी कार्रवाई से नहीं बचाया जा सकेगा। इसकी एक वजह चारबाग के दो अवैध होटलों व लेवाना में हुए अग्निकांड के तुरंत बाद एलडीए समेत अन्‍य विभागों के दोषियों पर हुई फौरी कार्रवाईयों को लेकर माना जा रहा। हालांकि लखनऊ के सबसे बड़े अग्निकांड की जांच से कितने दोषियों को सजा मिलती है यह शासन स्‍तर से कार्रवाई होने के बाद ही पूरी तरह साफ हो सकेगा।

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इस तरह एलडीए ने पूरी की कागजी कार्रवाई

वहीं आज ध्‍वस्‍तीकरण आदेश के बारे में एलडीए सचिव विवेक श्रीवास्तव ने मीडिया से कहा कि वीरेन्द्र शुक्ला, सुरेन्द्र शुक्ला व अन्य द्वारा अलीगंज के सेक्टर-डी में भूखण्ड संख्या-एम.एस.- 102 पर अवैध रूप से व्यावसायिक भवन का निर्माण कराया था। जिसके विरूद्ध विहित प्राधिकारी द्वारा बीती 23 जून को उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम की धारा-27 (1) के तहत नोटिस जारी किया था। इसमें विपक्षी को स्थल पर किये गये निर्माण की वैद्यता के संबंध 15 दिन के अंदर साक्ष्य प्रस्तुत करने के निर्देश दिये गये थे। उक्त नोटिस स्थल पर चस्पा करने के साथ ही इसकी प्रति विपक्षी को जेल में भी प्राप्त करायी गयी थी।

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इसी क्रम में 15 दिन से ठीक पहले बीती सात जुलाई को एलडीए की कोर्ट में  विहित प्राधिकारी अतुल कुमार ने प्रकरण की पहली सुनवायी की। जिसमें विपक्षी के अधिवक्ता की अपील पर आपत्ति दर्ज करने के लिए एक दिन का समय दिया गया। विपक्षी के अधिवक्ता ने अगले न्यायालय के समक्ष आपत्ति दर्ज करायी।

इस आपत्ति पर प्रवर्तन जोन चार की ओर से जवाब दाखिल किया गया। फिर नौ जुलाई को विहित प्राधिकारी अतुल कुमार ने प्रकरण की सुनवायी करते हुए सभी तथ्यों का परीक्षण किया गया।

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जिसके बाद आज दस जुलाई को विहित प्राधिकारी ने व्यावसायिक निर्माण को अवैध घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण आदेश पारित किया। आदेश के बाद प्रवर्तन जोन चार के जोनल अधिकारी माधवेश कुमार ने अपनी टीम के साथ जाकर अवैध बिल्डिंग पर आदेश की प्रति चस्पा कराई है।

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