भ्रष्टाचार में डूबे होने का आरोप लगा, प्रियंका गांधी ने भाजपा सरकार के खिलाफ असम कांग्रेस का आरोप पत्र किया जारी

प्रियंका गाधी
असम कांग्रेस नेताओं के साथ आरोप पत्र जारी करतीं प्रियंका गांधी।

आरयू वेब टीम। असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार चयन समिति की अध्यक्ष प्रियंका गांधी आज दो दिन के दौरे पर गुवाहाटी पहुंचीं। जहां कांग्रेस महासचिव ने गुवाहाटी में भाजपा के नेतृत्व वाली असम सरकार के खिलाफ असम कांग्रेस का 20 सूत्री ‘आरोपपत्र’ जारी किया। आरोप पत्र में सरकार पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने और अल्पसंख्यकों में भय पैदा करने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है।

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि एक दशक के शासनकाल के बावजूद भाजपा सरकार छह आदिवासी समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलवाने और चाय बागान श्रमिकों की दैनिक मजदूरी बढ़ाकर 351 रुपये करने के अपने वादे को पूरे करने में विफल रही। साथ ही कांग्रेस ने आरोप पत्र में भाजपा के नेतृत्व वाली असम सरकार पर ‘व्यापक भ्रष्टाचार’ में डूबे होने का भी आरोप लगाया। पार्टी ने मुख्यमंत्री हिमंत विश्‍वाशर्मा और उनके करीबी मंत्रियों और उनके परिवार के सदस्यों पर ‘अवैध रूप से संपत्ति जमा करने’ का गंभीर आरोप लगाया है। कांग्रेस ने इन आरोपों पर भाजपा और हिमंत विश्‍वाशर्मा से जवाब मांगा है।

…फिर मजबूती से चुनाव लड़ें

वहीं असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के उम्मीदवार चयन पर प्रियंका गांधी ने कहा कि अभी मैं सबसे मिल रही हूं और उनके सुझाव ले रही हूं। अगले दो दिनों तक हम अलग-अलग जितने लोगों से मिल सकते हैं, उनसे मिलेंगे। असम स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य भी पिछले 4-5 दिनों से हर जिले में जा रहे हैं। पूरा फीडबैक लेने के बाद हमारी कोशिश यही रहेगी कि अच्छे से चुनाव के टिकट बांटे जाएं और फिर मजबूती से चुनाव लड़ें।

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गुवाहाटी पहुंचने पर प्रियंका ने मां कामाख्या देवी के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लिया। मंदिर दर्शन के बाद वह राजीव भवन पहुंचीं, जो असम प्रदेश कांग्रेस समिति का मुख्यालय है। वहां उन्होंने उम्मीदवारों के चयन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बैठकों की अध्यक्षता की। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि प्रियंका गांधी असम में उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया पर करीब से नजर रख रही हैं। पार्टी के पदाधिकारी बता रहे हैं कि इस बार उम्मीदवारों का चयन करने के लिए ऐसा व्यापक और व्यवस्थित तरीका अपनाया गया है, जिसमें जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं और जिला स्तर के नेताओं से विस्तृत सुझाव और जानकारी ली जा रही है।

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