आरयू वेब टीम। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर बुधवार को तीखा हमला बोला। सीएम ममता ने मोदी सरकार के साथ ही चुनाव आयोग पर संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग करके लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया।
ममता ने उत्तर बंगाल के मैनागुड़ी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग वोटर्स से मतदान के अधिकार छीन रहे हैं।’’ साथ ही चेतावनी दी कि अगला कदम राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) लागू करके नागरिकता छीनने का प्रयास हो सकता है। वहीं ये भी आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के माध्यम से कुछ समुदायों को चुनाव प्रक्रियाओं से बाहर रखा जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘राजबंशियों के नाम एसआइआर के जरिए हटा दिए गए हैं। महिलाओं के नाम भी हटाए जा रहे हैं। अगर एसआइआर की वजह से मौतें होती हैं, तो जिम्मेदारी कौन लेगा?’’ आगे कहा कि ‘‘निर्वाचन आयोग, भाजपा और केंद्र सरकार संविधान का पालन नहीं कर रहे और मतदान के अधिकार छीनने की कोशिश कर रहे हैं। इस दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लिए बिना ममता ने जनसभा में उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे ‘‘यहां मौजूद सज्जन और दिल्ली में दोनों सज्जनों को विदा’’ करें।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस को अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तृणमूल कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत राज्य की जनता है। उन्होंने भाजपा और निर्वाचन आयोग पर मिलीभगत से काम करने का आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘उन्होंने हमसे सब कुछ छीन लिया है। अब मेरे पास सिर्फ हमारी जनता है।’’
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वहीं उत्तर बंगाल के लिए रवाना होने से पहले कोलकाता हवाई अड्डे पर निर्वाचन आयोग के छह साल पुराने दस्तावेज का हवाला देते हुए ममता बनर्जी ने इसी तरह के आरोप लगाए थे। इस दस्तावेज में बीजेपी का चुनाव चिन्ह कमल अंकित था। उन्होंने कहा, ‘‘आप छुपकर क्यों खेल रहे हैं? खुलकर सामने आइए और मुकाबला करिए।’’




















