आरयू वेब टीम। नोएडा में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर कर्मचारियों के प्रदर्शन को मंगलवार को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का समर्थन मिला है। राहुल ने इसे श्रमिकों पर अत्याचार बताते हुए कहा कि ”कल नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वो इस देश के श्रमिकों की आखिरी चीख थी, जिसकी हर आवाज को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया।”
राहुल गांधी ने कहा, ”नोएडा में काम करने वाले एक मजदूर की 12,000 महीने की तनख्वाह,चार हजार से सात हजार किराया। जब तक तीन सौ की सालाना बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक पांच सौ सालाना किराया बढ़ा देता है। तनख्वाह बढ़ने तक ये बेलगाम महंगाई जिंदगी का गला घोंट देती है, कर्ज की गहराई में डुबा देती है। यही है विकसित भारत का सच।”
इस दौरान राहुल ने प्रदर्शन कर रही एक महिला कर्मचारी के बयान का भी जिक्रकर कहा, ”एक महिला मजदूर ने कहा कि गैस के दाम बढ़ते हैं, पर हमारी तनख्वाह नहीं। इन लोगों ने शायद इस गैस संकट के दौरान अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए पांच हजार का भी सिलेंडर खरीदा होगा।” उन्होंने आगे कहा, ”ये सिफ नोएडा की बात नहीं है। और यह सिर्फ भारत की भी बात नहीं है। दुनियाभर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से सप्लाई चेन टूट गई है। मगर, अमेरिका के टैरिफ वॉर, वैश्विक महंगाई, टूटती सप्लाई चेन, इसका बोझ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मित्र उद्योगपतियों पर नहीं पड़ा। इसकी सबसे बड़ी मार पड़ी है उस मजदूर पर जो दिहाड़ी कमाता है, तभी रोज खाता है।”
भाजपा सरकार को निशाने पर लेते हुए राहुल गांधी ने कहा, ”वो मजदूर, जो किसी युद्ध का हिस्सा नहीं, जिसने कोई नीति नहीं बनाई, जिसने बस काम किया। चुपचाप बिना शिकायत। और उसके बदले अपना हक मांगने पर उन्हें मिलता क्या है? दबाव और अत्याचार।” कांग्रेस नेता ने मोदी सरकार की ओर से लाए गए श्रम कानूनों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ”एक और जरूरी मुद्दा – मोदी सरकार ने चार श्रम कानून जल्दबाजी में बिना संवाद नवंबर 2025 से लागू कर, काम का समय 12 घंटे तक बढ़ा दिया।
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ऐसे में जो मजदूर हर रोज 12-12 घंटे खड़े होकर काम करता है फिर भी बच्चों की स्कूल फीस कर्ज लेकर भरता है। क्या उसकी मांग गैरवाजिब है? और जो उसका हक हर रोज मार रहा है – वो विकास कर रहा है?” कांग्रेस सांसद ने कहा, ”नोएडा का मजदूर 20,000 मांग रहा है। यह कोई लालच नहीं। यह उसका अधिकार, उसकी जिंदगी का एकमात्र आधार है। मैं हर उस मजदूर के साथ हूं, जो इस देश की रीढ़ है और जिसे इस सरकार ने बोझ समझ लिया है।”
बता दें कि नोएडा में नौ अप्रैल से सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे 42 हजार कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। सुनवाई न होते देख अलग-अलग इलाकों में फैक्ट्री कर्मचारियों के प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। इस दौरान
350 से ज्यादा फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की। 50 से ज्यादा गाड़ियां फूंक दीं। 150 वाहन तोड़ दिए। जिसके बाद पुलिस ने बलपूर्वक कार्रवाई करते हुए अब तक 300 से अधिक गिरफ्तारियां की हैं। जबकि अफवाह फैलाने वाले कुछ ग्रुप आइडेंटिफाई भी किया है।




















