आरयू वेब टीम। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में तृणमूल कांग्रेस की शिकस्त और अपने साथ हुई अभद्रता के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सख्त रूप अपना लिया है। मंगलवार को ममता बनर्जी ने अपनी हार को सिरे से नकारते हुए इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया। उन्होंने सीधे तौर पर चुनाव आयोग के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को अपनी हार का जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह जनता का फैसला नहीं, बल्कि ‘मैच फिक्सिंग’ का नतीजा है। ममता ने स्पष्ट किया कि उनके इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि वे चुनाव हारी नहीं हैं, बल्कि उन्हें साजिश के तहत हराया गया है। मैं कोर्ट में लड़ूंगी।
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ममता बनर्जी ने एक प्रेसवार्ता आयोजित कर कहा कि अपनी हार का ठीकरा सबसे ज्यादा चुनाव आयोग पर फोड़ा। उन्होंने आयोग को ‘भाजपा का एजेंट’ बताते हुए कहा कि उनके छात्र जीवन से लेकर अब तक उन्होंने इतना ‘गंदा और घिनौना’ चुनाव कभी नहीं देखा। ममता ने दावा किया कि ‘वोटर लिस्ट रिवीजन’ के नाम पर जानबूझकर उनके समर्थकों के करीब 90 लाख वोट काट दिए गए। जब टीएमसी कोर्ट गई, तो केवल 32 लाख नाम बहाल हुए।
चोरी-छिपे जोड़े गए सात लाख नए नाम
ममता ने ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बाद में चोरी-छिपे सात लाख नए नाम जोड़े गए, जिसके बारे में किसी को खबर तक नहीं होने दी गई। ममता के अनुसार, चुनाव से ठीक दो दिन पहले निष्पक्ष अधिकारियों को हटाकर भाजपा के पसंदीदा अफसरों को तैनात करना ‘मैच फिक्सिंग’ का हिस्सा था। वहीं टीएमसी प्रमुख ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की विश्वसनीयता पर भी सवालिया निशान लगाए।
ईवीएम में 80 से 90 प्रतिशत चार्जिंग कैसे
सीएम ने तकनीकी धांधली का दावा करते हुए पूछा कि वोटिंग खत्म होने के कई घंटों बाद भी ईवीएम में 80 से 90 प्रतिशत चार्जिंग कैसे रह सकती है? यह पूरी तरह नामुमकिन है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि काउंटिंग के दौरान उनके एजेंटों को डराया-धमकाया गया और भाजपा के ‘गुंडों’ ने उन पर शारीरिक हमले भी किए। ममता ने दर्द बयां करते हुए यहां तक कहा कि “मेरी पीठ और पेट पर लातें मारी गईं।”
पूरा ‘इंडिया ब्लॉक’ खड़ा है साथ
प्रेसवार्ता के दौरान भावुक होते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि “हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मैं मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हूं, लेकिन मेरी लड़ाई भाजपा से नहीं बल्कि पक्षपाती संस्थानों से है।” हालांकि बाद में उन्होंने अपने इरादे साफ कर दिए कि वे इस्तीफा नहीं देंगी बल्कि इस ‘वोट डकैती’ के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी। साथ ही कहा कि पूरा ‘इंडिया ब्लॉक’ उनके साथ खड़ा है और वे इस धांधली को सुप्रीम कोर्ट तक लेकर जाएंगी।
बड़े नेताओं ने फोन कर जताया समर्थन
वहीं ममता ने बताया कि सोनिया गांधी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, उद्धव ठाकरे और हेमंत सोरेन जैसे बड़े नेताओं ने उन्हें फोन कर अपना समर्थन जताया है। उन्होंने ये भी जानकारी दी कि कल अखिलेश यादव भी उनसे मिलने कोलकाता आ रहे हैं। ममता ने आक्रामक अंदाज में कहा, “अब मैं एक आजाद पंछी की तरह हूं। भाजपा ने हमारे लोगों को टॉर्चर करना शुरू कर दिया है, अनुसूचित जाति और जनजाति के परिवारों पर हमले किए जा रहे हैं, लेकिन हम लड़ना नहीं छोड़ेंगे।”
…कैसे तकनीकी या रणनीतिक चूक
इस दौरान टीएमसी सुप्रीमो ने चुनाव में हुई गड़बड़ी और हार के कारणों की गहराई से जांच करने के लिए ममता ने एक विशेष समीक्षा टीम गठित करने की घोषणा की है। इस टीम में पार्टी के दस दिग्गज नेता शामिल होंगे, जो हर सीट पर जाकर डेटा का विश्लेषण करेंगे और यह पता लगाएंगे कि कहां और कैसे तकनीकी या रणनीतिक चूक हुई। ममता ने साफ कर दिया कि ये लड़ाई अब सड़कों से लेकर अदालत तक ‘आर-पार’ की होगी।

















