आरयू ब्यूरो, लखनऊ। टेंडर पूलिंग के लिए आए दिन सुर्खियों में रहने वाले लखनऊ विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों का एक बड़ा कारनामा सामने आया है। इस बार तबादला होने के बाद भी प्राधिकरण में जमे अभियंताओं ने योगी सरकार की भ्रष्टाचार रोकने की नीति को खुली चुनौती देने वाली मनमानी अपने ही कार्यालय में कर दिखाई है। इंजीनियर बिना ई-टेंडर कराये ही रेनेवोशन के नाम पर दस-बीस लाख नहीं, बल्कि साढ़े चार करोड़ का काम वहां करा रहें जहां खुद विभाग के मुखिया व चीफ इंजीनियर समेत सभी बड़े अधिकारी भी बैठते हैं। बेहद गंभीर मामला सामने आने के बाद अधिकारियों की मंशा पर भी सवाल उठ रहें हैं।
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यह है मामला-
बताते चलें कि गोमतीनगर स्थित एलडीए ऑफिस में लगभग दो साल से रेनेवोशन-अपग्रेडेशन के नाम पर पुराने भवन समेत करीब एक दशक पहले ही आबाद हुई 11 मंजिला नई बिल्डिंग में भी युद्धस्तर पर आंतरिक तोड़फोड़ चल रही। इन कामों को अनुरक्षण के अधिशासी अभियंता मनोज सागर व जेई आशीष श्रीवास्तव करा रहें। (दोनों ही इंजीनियरों का करीब सालभर पहले शासन ने गैरजनपद तबादला किया था) विभाग में हो रही अंधाधुंध तोड़फोड़ के क्रम में प्राधिकरण की नई बिल्डिंग की आठवीं मंजिल पर भी करीब महीनेभर से काम चल रहा, जबकि आठवें व सातवें फ्लोर का टेंडर अभी एलडीए ने किया ही नहीं है। लगभग साढ़े चार करोड़ (जीएसटी सहित) का यह टेंडर शुक्रवार को खुलेगा और किस ठेकेदार को मिलेगा यह प्रक्रिया कागजों में पूरी होने में कम से कम साप्ताहभर का समय लगेगा। ऐसे में पहले से ही काम होने का मतलब है समान्य निविदा (दस लाख तक के काम) मैनेज करने के लिए बदनाम एलडीए में ई-टेंडर की पूलिंग भी आम हो चुकी है।
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मुख्यालय में ऐसा हाल तो…
बिना टेंडर के साढ़े चार करोड़ के काम होने का खुलासा होने के बाद तरह-तरह के सवाल उठने लगे हैं। अंदाजा लगाया जा रहा कि योगी सरकार की प्राथमिकता में शामिल ई-टेंडर प्रक्रिया की एलडीए मुख्यालय में ही ऐसी दुर्दाशा है तो ऑफिस के बाहर दूर-दराज के इलाकों में चल रही हजारों करोड़ की योजनाओं के टेंडर में इंजीनियर क्या ही गुल खिला रहे होंगे।
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ठेका नहीं, होता है पट्टा!
सू़त्रों की मानें तो कुछ इंजीनियर-अफसर की मनमानी के चलते ई- टेंडर प्रक्रिया भी काफी हद तक भ्रष्टाचार की बलि चढ़ चुकी है। यही वजह है कि नई व पुरानी बिल्डिंग रेनोवेशन के करोड़ों वाले दर्जनों काम मात्र दो ही ठेकेदारों की झोली में डाले गये हैं। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि टेंडर में कम्पटीशन नहीं होने के चलते प्राधिकरण को भी करोड़ों रुपये की चोट हर महीने लग रही, हालांकि इन बातों में कितना दम है इसका पता प्राधिकरण के किसी ईमानदार अफसर द्वारा जांच कराने के बाद ही न सिर्फ साफ हो पाएगा, बल्कि योगी सरकार की छवि धूमिल करने वाले दोषियों पर भी कार्रवाई होे सकेगी।
क्या बोले चीफ इंजीनियर-
वहीं इस मामले में एलडीए के चीफ इंजीनियर मानवेंद्र सिंह का कहना है कि नई बिल्डिंग के आठवें फ्लोर पर होने वाले रेनोवेशन के काम की जानकारी उन्हें है, लेकिन इसका टेंडर नहीं किया गया है इस बारे में उन्हें नहीं पता। मामले की पूरी जानकारी कर आगे की कार्रवाई जायेगी।
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