आरयू ब्यूरो, लखनऊ। जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद से भाजपा सरकार जेनजी को साधने में जुट गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व आरएसएस के बाद अब योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। जिसके तहत युवा आइएएस, आइपीएस और आइएफएस अधिकारी हर महीने कम से कम एक इंटरमीडिएट-लेवल स्कूल का दौरा करेंगे और छात्रों से करियर ऑप्शंस, प्रतियोगी परीक्षाओं और उनके भविष्य से जुड़े अन्य मुद्दों पर बातचीत करेंगे। सरकार के अनुसार इस खास कोशिश का मकसद जेनजी यानी आज की युवा पीढ़ी को सही दिशा दिखाना है।
योगी सरकार के मुताबिक इस पहल का मकसद छात्रों को हायर और टेक्विकल एजुकेशन, रोजगार, एंटरोप्रेन्योरशिप और स्टार्ट-अप के बारे में गाइडेंस देंगे। साथ ही, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ सीधी बातचीत के जरिए उनमें आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित करने में मदद करना भी इसका उद्देश्य है।
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माध्यमिक शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने अधिकारियों को इस कार्यक्रम की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। डिविजनल कमिश्नर समय-समय पर इसके एक्जीक्यूशन का रिव्यू करेंगे, जबकि जिला स्कूल निरीक्षक भाग लेने वाले अधिकारियों और स्कूलों के बीच कोर्डिनेट करेंगे।
छात्रों से मिले सुझाव होंगे शामिल
जिला मजिस्ट्रेटों को जारी निर्देशों के तहत, हर जिले में ऐसे दौरों का मंथली कैलेंडर तैयार किया जाएगा और पिछले महीने आयोजित कार्यक्रमों की रिपोर्ट हर महीने की पांच तारीख तक माध्यमिक शिक्षा विभाग को भेजी जाएगी। रिपोर्ट में दौरा किए गए स्कूल, भाग लेने वाले अधिकारी, चर्चा किए गए विषय और छात्रों से मिले सुझाव शामिल होंगे।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मिलेगी गाइडेंस
छात्रों को यूपीएससी, यूपीपीएससी, यूपीएसएसएससी
, एनडीए, जेईई, नीट और सीयूईटी सहित अन्य राज्य-स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के बारे में भी गाइडेंस मिलेगा। उच्च, तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा, रोजगार, उद्यमिता और स्टार्ट-अप के अवसरों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम में वित्तीय साक्षरता, संचार कौशल, व्यवसाय प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, नशा मुक्ति, तनाव प्रबंधन और आत्मविश्वास बढ़ाने जैसे विषय भी शामिल होंगे। छात्रों को युवाओं के लिए केंद्र और राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।




















