पांच दिन में दूसरी बार खुला LDA के अर्जन का बड़ा कांड, LARA कोर्ट ने कुर्क किया प्रबंध नगर का 52 करोड़ 35 लाख, अर्से से जमा सर्वेयर निलंबित

एलडीए

आरयू ब्‍यूरो, लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण के अर्जन अनुभाग में बाबू दीपक शर्मा द्वारा एनओसी के बदले दो करोड़ 60 लाख की रिश्‍वत मांगने का मामला अभी अधिकारी ठीक से ठंडा भी नहीं कर सकें थे कि इसी अनुभाग से एक और बड़ा कांड सामने आया है। यहां भूमि अर्जन के एक मामले में संदिग्‍ध तरीके से सर्वेयर व अधिकारियों द्वारा पैरवी अटकाने के चलते प्रबंध नगर योजना के लिये जमा एलडीए की धनराशि में से 52 करोड़ 35 लाख रूपये भूमि अर्जन पुनर्वासन एवं पुनर्व्‍यवस्‍थापन प्राधिकरण (लारा) कोर्ट ने कुर्क कर दिया है।

अर्जन अनुभाग में हुए करोड़ों की वसूली वाले रिश्‍वत कांड के मात्र चार दिन बाद ही इस आदेश के सामने आते ही एलडीए में एक बार फिर हड़कंप मच गया। शुरूआती जांच में दोषी मिलने पर अर्जन अनुभाग में करीब डेढ़ दशक से तैनात सर्वेयर उदय नारायण को एलडीए उपाध्‍यक्ष प्रथमेश कुमार ने आज निलंबित कर दिया है, जबकि तहसीलदार अर्जन तुलसीराम को प्रतिकूल प्रविष्टि दी है। साथ ही अर्जन से जुड़े अन्‍य अफसरों से भी वीसी ने जवाब तलब किया है।

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अपर सचिव ज्ञानेन्द्र वर्मा ने बताया कि जियामऊ में गोमती बैराज से लामार्टिनियर तक सुनियोजित विकास योजना भाग-एक के अंतर्गत प्राधिकरण द्वारा मजहर अली खान की भूमि अर्जित की गयी थी। जिसमें अपर जिलाधिकारी ने भूमि के प्रतिकर की धनराशि तय की थी। निर्धारित प्रतिकरण से संतुष्ट नहीं होने पर जमीन मालिक ने लारा कोर्ट में वाद योजित किया था। प्राधिकरण की ओर से प्रभावी पैरवी न होने के कारण न्यायालय ने प्रतिकर में बढ़ोत्तरी करते हुए आदेश पारित कर दिया था।

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हाई कोर्ट में अपील की जगह अर्जन में खेल!

अपर सचिव के अनुसार लारा कोर्ट आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू की गयी थीं। प्राधिकरण की ओर से नामित अधिवक्ता बीते मार्च में उच्च न्यायालय में अपील दाखिल की गयी। नामित वकील ने अर्जन अनुभाग के सर्वेयर व अधिकारियों की पोल खोलते हुए वीसी को बताया कि अर्जन के लोगों को बार-बार बताने के बाद भी अधिकारी व सर्वेयर ने कोर्ट केस का भुगतान ही नहीं कराया, जिसके चलते अपील पर सुनवाई नहीं हो सकी।

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दूसरी ओर इसका फायदा उठाते हुए भू-स्वामी ने पूर्व पारित आदेश के अनुपालन के लिए लैंड एक्विजिशन रिहैबिलिटेशन एंड रिसेटलमेंट अर्थारिटी (LARA) में निष्पादन वाद दाखिल कर दिया। जिसमें लारा कोर्ट ने प्राधिकरण के खिलाफ 52 करोड़ 35 लाख रूपये से अधिक की धनराशि की कुर्की आदेश पारित कर दिया है।

अदालत से एलडीए को लगे इतने बड़े झटके की प्रथमेश कुमार ने समीक्षा कि तो पता चला कि अगर मार्च 2026 में समयानुसार कार्रवाई कर दी जाती, तो कुर्की की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। मामले में संगीन गड़बड़ी उजागर होने पर उपाध्यक्ष ने सर्वेयर उदय नारायण को तत्काल प्रभाव से निलम्बित करते हुए जांच के आदेश दिये हैं।

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कर्मी को निलंबित करने के साथ ही नव नियुक्त संयुक्त सचिव अरविंद कुमार द्विवेदी को वीसी ने जांच अधिकारी नामित किया है। अरविंद कुमार अब यह भी जांच करेंगे कि नियम विरूद्ध (तीन साल से अधिक एक ही कुर्सी पर तैनाती) तरीके से अर्जन में करीब एक दशक से तैनात सर्वेयर को मोहरा बनाकर अर्जन के अधिकारियों ने ही तो नहीं एलडीए को बड़ी आर्थिक चोट देते हुए अपनी तिजोरी भरने का ताना-बाना बुना था।

लंबे समय से एक ही जगह जमे अफसरों के चहेते

वहीं अब ईमानदार और समझदार अधिकारी लगातार एलडीए के नाम को कलंकित करने वाले सामने आ रही भ्रष्‍टाचार व मनमानी की घटनाओं से सबक लेते हुए इसकी भी समीक्षा कर सकते हैं कि किन अनुभागों में शासनादेशों के खिलाफ जमे इंजीनियर, बाबू व अन्‍य कर्मी गड़बड़ी कर रहें। सालों से कॉमर्शियल सेल, वित्‍त, कॉस्टिंग, अभियंत्रण के जोन, उद्यान, ट्रांसपोर्टनगर व गोमतीनगर समेत अन्‍य योजनाओं के अलावा नजूल, अर्जन, ट्रस्‍ट, मैप सेल व कैंप कार्यालयों से उन्‍हें हटाते हुए अधिकारी मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ से सीधे जुड़े विभाग की लगातार हो रही बदनामी के क्रम को भी रोक सकेंगे। साथ ही सीएम के विभाग की छवि बचाने के लिये तबादले के बाद भी एलडीए का पीछा नहीं छोड़ने वाले अधिकारी व अभियंताओं के कार्यप्रणाली की भी समीक्षा हो सकती है।

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